आखिर क्यों

कलमकार खेम चन्द सभी लोगों को गाँव से जुड़े रहने की सलाह देते हैं। गाँववालों ने ही तो शहर बसाया है फिर क्यों वहां बसने के बाद गाँव भूल जाते हैं?

ना छोड़ो घरवार, गांव, कस्बा ये ज़मीन पुश्तैनी
ऐही तो है हमारे पुर्वजों की युगों-युगों की निशानी.

ना बांटों कुटुंब को कभी रक्त सभी खानदानी है
खेतीबाड़ी भी ज़रूरी है परम्परागत परम्परा सभी को निभानी है

किस काम का ये दिखावा किसको अकड़ दिखानी है
ना कर ग़ुरूर दो पल का हमारी ये जवानी है

अन्न से ही शुरु हर करोबार है ऐही बात तुमको समझानी है
ना करो उपहास किसी का बारी वक्त वक्त पर हम सबकी आनी है

मिलकर रहो सभी इंसानियत से विश्व भर ये एकता दिखानी है
वक्त बदल जाता है रजिस्ट्री किस बात की तुम्हें करवानी है

सबका हो सही सम्मान नहीं रूह किसी की रुलानी है
सब एक है धर्म, जात की परत अब हमको हटानी है

ना हो निराश “नादान कलम” वक्त की चक्की चलानी है
खेम भी बेसुध है विचारों में कब वो मनमोहक भोर आनी है

~ खेम चन्द 


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