भारत में सूफी संतों का आगमन

सूफी काव्य निर्गुण भक्ति धारा की दूसरी शाखा है। भारत में सूफी संतों का आगमन १२वीं सदी से माना जाता है। सूफीमत इस्लाम धर्म की एक उदार शाखा है । सूफी फकीरों ने हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रयास किया और दोनों संस्कृतियों में सामंजस्य  बनाए  रखा। इनके दोहों में भारतीयता की झलक देखी जा सकती है।

सूफी काव्य-धारा के पहले कवि मुल्ला दाऊद ने अवधि भाषा में ‘चंदायन’ नामक सूफी प्रेमकाव्य की रचना १३७९ ईसवी में  रचा। दूसरे प्रसिद्ध कवि मलिक मुहम्मद जायसी हैं जिन्होने ‘पद्मावत’ (१५४० ई.) की रचना की। अन्य कवि: अमीर खुसरो, कुतुबन, मंझन, नूर मोहम्मद, कासिम शाह, उस्मान।

भारत के सूफी संतो द्वारा रचित कुछ ख़ास दोहे और उनका अर्थ-

१) अमीर ख़ुसरो का आख़िरी दोहा

गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल ख़ुसरो घर आपने सांझ भई चहुं देस॥

इस आख़िरी दोहे के साथ ख़ुसरो ने भी संसार छोड़ दिया.


२) मलिक मोहम्मद जायसी का  यह दोहा बताता है की वे इस्लाम और हिंदू भावना से वे ऊँचे उठे हुए थे-

तिन्ह संतति उपराजा, भांतिहि भांति कुलीन
हिंदू तुरुक दुबो भये, अपने- अपने दीन।।


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