Category: पहली पोस्ट

  • तुम समझती क्यों नहीं हो

    तुम समझती क्यों नहीं हो

    आदत-सी हो गई है मुझको तेरी तुम समझती क्यों नहीं हो मिलना है हमारा बेहद जरूरी तुम समझती क्यों नहीं हो सच में तुम हो गई हो मेरी मजबूरी तुम समझती क्यों नहीं हो सर्द मौसम की गुनगुनी धूप-सी हो तुम तुम समझती क्यों नहीं हो इश्क़ हक़ीक़ी हो तुम ही मेरी तुम समझती क्यों…

  • देश लड़ रहा है

    देश लड़ रहा है

    देश लड़ रहा है हम जरूर जीतेंगे, कोरोना जैसी महामारी से, हर वो इंसान कोरोना योद्धा है जो अपने परिवार को बचा रहा है, देश लड़ रहा है, हाथ मिलाने व गले मिलने की परंपरा अब खत्म हो रही है, मानो ऐसा लग रहा है जैसे हम सब पुराने समय में पहुँच चुके है। देश…

  • मेरी मां और उसका मंदिर

    मेरी मां और उसका मंदिर

    माता सदा अपनी संतान की सलामती ही चाहती है और इसके लिए ईश्वर से भी प्रार्थना करती है। कलमकार विनीत पांडेय मां और उसके मंदिर के बारे में बताने का प्रयास कर रहें हैं। मेरी मां और उसका मंदिर संजोकर रखे हैं जहां उसने ढ़ेर सारे भगवानों के बीच असंख्य प्रार्थनाएं और मनौतियां घण्टों पाठ…

  • प्रकृति और मनुष्य

    प्रकृति और मनुष्य

    प्रकृति और मनुष्य का रिश्ता बहुत ही प्यारा है, इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है। कलमकार सुमित सिंह तोमर बताते हैं कि किस प्रकार प्रकृति को क्षति पहुंच रही है, अनेक प्राणी तो विलुप्त होने के कगार पर हैं। हम सब को मिलकर इसका संरक्षक बनना है। हर ओर व्याधि की व्याकुलता हैं त्रस्त…

  • निगाहों की बातें

    निगाहों की बातें

    आँखें बातें करना भी जानती हैं और इशारों की यह बोली हर कोई जानता है। कलमकार अभय द्विवेदी निगाहों की बात का उल्लेख अपनी कविता में कर रहे हैं। निगाहों ने की हैं निगाहों की बातें, नीली नहर सी निगाहों की बातें, मेरे सुख़न में लिखी हैं मैनें, उसकी प्यारी निगाहों की बातें, मिलो तो…

  • मदर डे

    मदर डे

    माँ के प्रेम को किसी भी एक दिन में बांध पाना बहुत मुश्किल होता है लेकिन फिर भी मदर डे मनाया जाता है। जिससे बच्चा माँ को प्यार और सम्मान दे सके जिसकी वह हकदार होती हैं। भारत देश में हर बर्ष मदर डे को मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। अगर…

  • माँ की ममता

    माँ जगत की जीवनदायिनी है। खुशियों की त्रिवेणी प्रवाहिनी है। माँ जीवन की बुनियाद है। हर वक्त पुत्र के हित करती फरियाद है। माँ पिता के क्रोध पर शीतल-सा पानी है। दुनिया में कहीं भी माँ का ना मिला सानी है। माँ धर्म-कर्म व प्रेम का साधनापूर्ण योग है। संतान की खुशियों के सारे उसके…

  • मेरे अंतस

    मेरे अंतस

    हमारे तुम्हारे मन में न जाने कितनी यादें, कल्पनाएँ और इरादे भरे पड़े हैं। कलमकार नमिता प्रकाश ने इस कविता में इसी संदर्भ में अपने भाव प्रकट किए हैं। तेरे अन्तसमेरे अन्तस,कुछ औंर नहीकेवल छवि है।जो गुजरे वो दिन सुनहरे,उज्जवल गीत तेरे, मेरे।तुम नहींहै सिर्फ आत्माएंगुंचा, गुंचा व्याप्त कवि है।सुधियों के मिस पावन प्रसंगसत्य, निष्ठा…

  • श्रमिक न घबराये श्रम से

    श्रमिक न घबराये श्रम से

    श्रमिक! न घबराये, श्रम से मेहनत करता है दम-खम से। फिर! चूल्हा कल जलेगा घर पर चिन्ता उसको यही सताये। श्रमिक! श्रम की गर्मी से पिघला लोहा आकार है देता। खेतों में, कारखानों में खून जलाता पसीना बहाता। सुस्ता ले जो पल दो पल साहब! उस पर है चिल्लाता। श्रमिक! उपेक्षित शोषित-पीड़ित; अपना भी, हक़…

  • वास्तविकता

    वास्तविकता

    जो दिखाई देता है वह वास्तविकता नहीं है, वास्तविकता जानने के लिए आपको उस इंसान व चीज़ को बहुत करीब से समझना होगा। कलमकार दिव्यांगना की एक कविता पढ़िए जो इस विषय और जानकारी प्रदान कर रही है। तुम अगर आज के दौर में बैठे हो, कमरे के किसी अंधेरे कोने में, मोबाइल लैपटॉप लिए,…

  • क्योंकि मज़दूर हूँ

    क्योंकि मज़दूर हूँ

    दुनिया के सामने तस्वीर हमारी सब के जुबा पे नाम हमारी फिर भी ना कोई पहचान हमारी क्योंकि मैं मजदूर हूं दुनिया हो गई एक साथ आज सबके आगे फैला हाथ ऐसी हो गई दशा हमारी क्योंकि मैं मज़दूर हूं रोटी के लिए मर रहा हूं घर जाने को तरस रहा हूं फिर भी ना…

  • मज़दूर है बहुत मजबूर

    मज़दूर है बहुत मजबूर

    समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है ये जिसे हम मज़दूर शब्द से नवाज़ते है, कई क़िस्मों का है ये मज़दूर। बस नज़र आपकी है कि किस मोड़ पर वो सोच बैठे कि हाँ ये है मजबूर माफ़ी चाहूँगा ‘मज़दूर’। आइए इस कविता से जोड़ते हुए आपको मज़दूर दिवस की बधाइयाँ देता हूँ……. हाँ मज़दूर है…

  • वन मेले में

    वन मेले में

    वन मेले में, मिलकर सबने, सुन्दर द्वारे, प्रोल सजाएं। बन्दर बाजा, भालू डमरू, चित्तल ढ़म-ढ़म, ढ़ोल बजाएं। रंग-बिरंगें, परिधानों में, लदे हुए है सब गहनों में, हाथी, चीता, हिरण, बाघ ने, सुन्दर सुन्दर, रोल निभाएं। चाट-पकौड़ी वाले ठेले, खेल-खिलौने, बड़े अलबेले, और कोयल ने, गीत, कविता, मीठे सुरम्य, बोल सुनाएं। खाने-पीने और गाने का, फिर…