Category: सूची आधारित लेख

  • ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी साहित्यकार

    ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी साहित्यकार

    कृष्णा सोब्ती (२०१७) केदारनाथ सिंह (२०१३) अमरकांत (२००९) श्रीलाल शुक्ल (२००९) कुँवर नारायण (२००५) निर्मल वर्मा (१९९९) नरेश मेहता (१९९२) महादेवी वर्मा (१९८२) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय” (१९७८) रामधारी सिंह “दिनकर” (१९७२) सुमित्रानंदन पंत (१९६८)

  • राम की वंदना में समर्पित ५ अनमोल दोहे

    राम की वंदना में समर्पित ५ अनमोल दोहे

    भगवन श्रीराम की भक्ति में अनेक कवियों ने काव्य रचनाओं की प्रस्तुति की है। राम महिमा का वर्णन करने के लिए कई महान ग्रन्थों की रचना हुई है। रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं जिनकी रामचरितमानस हिंदी साहित्य की एक महान कृति है। लोकभाषाओं और छंदों में रामकथा को कई कवियों ने…

  • कालजयी अनमोल दोहे (18)

    कालजयी अनमोल दोहे (18)

    भारत के संतों द्वारा रचित कुछ दोहा काव्य जिनके अर्थ सभी को भली भाँति पता हैं। इन अनमोल दोहों में जो ज्ञान/शिक्षा की बातें बड़ी सरलता से बताईं गईं वह अतुलनीय है। करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान॥ ~ वृंददास प्रेम प्रेम सब कोऊ कहत, प्रेम न जानत…

  • रहीम, कबीर और तुलसी के नीति के १५ अनमोल दोहे

    रहीम, कबीर और तुलसी के नीति के १५ अनमोल दोहे

    तुलसीदास के अनमोल दोहे देस काल करता करम, बचन विचार बिहीन। ते सुरतरु तर दारिदी, सुरसरि तीर मलीन।१। ~ स्थान, समय, कर्ता, कर्म और वचन का विचार करते ही कर्म करना चाहिए । जो इन बातों का विचार नहीं करते, वे कल्पवृक्ष के नीचे रहने पर भी दरिद्री और देवनदी गंगाजी के किनारे बसकर भी…

  • लोकप्रिय कवियों के २५ अनमोल दोहे

    लोकप्रिय कवियों के २५ अनमोल दोहे

    बिन स्वारथ कैसे सहे, कोऊ करुवे बैन।लात खाय पुचकारिये, होय दुधारू धैन॥ ~ वृंद१ » बिना स्वार्थ के कोई भी व्यक्ति कड़वे वचन नहीं सहता। कड़वा वचन सभी को अप्रिय होता है लेकिन स्वार्थी लोग उसे भी चुपचाप सुन लेते हैं, जैसे गाय के लात/पैर की मार खाने के बाद भी इंसान उसे दूलारता और…