Category: कविताएं
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सूर्योपासना का महान पर्व छठ पूजा
छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला हिन्दू पर्व है जो चार दिनों तक चलता है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है। छठी मैया, सूर्यदेव की बहन हैं, सूर्यदेव को अर्घ्य देने पर छठी मैया प्रसन्न होकर सुख-शांति प्रदान करती हैं। हिन्दी कलमकारों ने इस महापर्व…
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अन्तरराष्ट्रीय पुरूष दिवस पर कुछ विशेष रचनाएँ
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने की शुरुआत 1999 में की गई थी। आप भी अपने भाई, पिता, पुत्र, दोस्त व सहकर्मी को विशेष होने का एहसास जरूर कराएं। अन्तरराष्ट्रीय पुरूष दिवस (19 नवंबर) पर कुछ विशेष रचनाएँ पढ़ें। International Men’s Day 2020Theme: “Better Health for Men and Boys“ मासूम लड़के कभी देखा है क्या बच्चे सा…
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दीपावाली पर कलमकारों के संदेश
एक दीप कर्मवीरों के नाम चलो एक दीप जलाएंशहीद वीर सपूतों के नामऐसा एक सिद्धांत बनाएंसबके जीवन में खुशियां फैलाएं चलो एक दीप जलाएंदेश के पालनहार मेहनतकशकिसानों के नामऐसा एक अभियान चलाएंसब मिलकर साथ निभाएं । चलो एक दीप जलाएंदेश के भगवानकोरोना चिकित्सकों के नामऐसा हम त्यौहार मनाएंसब को नई राह दिखाएं। चलो एक दीप…
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जगमग दीपावाली
आज दीवाली है मिठाई ले आना बापू आज दीवाली है।सूखी रोटी खाऊंगा न आज दीवाली है।। नये कुर्ते और पाजामे ले आना मेरे।।मैं भी राजकुमार बनूँगा आज दीवाली है।। घर आंगन सबके सजे हैं कितने लगते प्यारे हैं।एक दीप जलेगा अपने घर आज दीवाली है।। अरमानों की फटी रजाई ओस की बूंदें टपकी है।महंगाई के…
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प्रकाशमय दिवाली
दीपावली त्योहार के महापर्व को प्रेम व भाईचारे के साथ मनाया जाना चाहिए। हिन्दी कलमकारों ने दिवाली पर कुछ रचनाएँ लिखीं हैं, आइए पढ़ते हैं। चलो दीपावली कुछ इस तरह मनाते हैं चलो यह दीपावली कुछ इस तरह मनाते हैं..उदास से चेहरों पर मीठी मुस्कान ले आते हैं. पटाखों का शोर व प्रदूषण व्यर्थ इस…
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अबकी दिवाली
कार्तिक मास की त्रयोदशी को धनतेरस और अमावस्या को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष की दिवाली पिछले वर्षों की दीपावाली से भिन्न है; जिसका कारण है कोरोना काल। हिन्दी कलमकारों ने अबकी दिवाली पर कुछ रचनाएँ लिखीं हैं, आइए उनका संदेश पढ़ते हैं। दिवाली इस बार सुघर हो जाए ये जीवन ऐसे…
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अक्टूबर २०२०- अधिकतम पढ़ी गई कविताएं
OCTOBER-2020: 1) द्रौपदी: नायिका बनी कलंक भरी कहानी की ~ अर्चना शर्मा • 2) गृहणियां ~ मधु शुभम पांडे • 3) होते हुए देखा है ~ कलमकार- अजीत लेखवार जौनपुरी १) द्रौपदी: नायिका बनी कलंक भरी कहानी की आज हृदय के झरते रक्त सेपवित्र हिमायल के पत्थरो परलिखती हूं में अपनी जुबानीकैसी अद्धभुत है मेरी…
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करवाचौथ की मंगलमय शुभकामनाएं
करवाचौथ प्रेम व समर्पण का पर्व है जो जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करता है। सभी माताओं व बहनों के सदा सुहागन एवं खुशहाल जीवन की कामना हिन्दी बोल इंडिया और उसके कलमकारों ने की है। आइए हिन्दी रचनाकारों की कुछ कविताएं इस पर्व को जानने के लिए पढ़ते हैं। करवा-चौथ सोलह श्रृंगार से सजाकरवा-चौथ का…
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भारत की महान विभूतियों के सम्मान में स्नेहा धनोदकर रचित कविताएं
१. अटल बिहारी जी छोड़ गए वो छाप अपनी,हर मानस पटल पर,आज भीं कई ऐसे,जो फ़िदा है अटल पर युग पुरुष भारत के,थे वो भाग्य विधाता,पदम् विभूषण, परम् ज्ञानी,भारत रत्न थे दाता रहे राजनीती कें शीर्ष पर,करवा लिया परमाणु परीक्षण,कारगिल हो या हो विदेश,कहीं ना झुके वो एक क्षण ब्रजभाषा और खड़ी बोली मेँ,करते थे…
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विजयादशमी की शुभकामनाएँ और कलमकारों के संदेश
विजयादशमी की शुभकामनाएँ और कलमकारों के संदेश इन कविताओं मे पढ़ें। यह आशा बनाएँ रखें कि असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत होगी। विजयादशमी विजयादशमी का पावन त्यौहार आया,साथ में अनेको खुशियों और,सत्यता का मार्गदर्शक लाया,बेशक उस मार्ग पर अनेक कठनाई,उलझने, मुसिबतें, रुकावटे,काँटों से बिछी राह होंगी,फिर भी सत्य के मार्ग…
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प्रेम- एक एहसास
1. मत पूछो ~ पुजा कुमारी साह मत पूछो मैं कैसी हुं, क्या कहुं मैं कैसी हूँ।। आँखों से निकल कर, गालो से फिसलकर जब आंसू की वो बूंद जमी पर गिर रही थी।तब आपने नही पूछा कैसी हूं मैं।आपसे जुड़ी मेरी सारी उम्मीदे तड़प-तड़प कर मर रही थी।एक-एक पल आपके दीदार को तड़प रही…
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सितंबर २०२०- अधिकतम पढ़ी गई कविताएं
SEPTEMBER-2020: 1) कवि कैसे बनते हैं ~ कलमकार सुभाष चन्द्र ‘सौरभ’ • 2) मै हिन्दी ~ कलमकार वर्षा यादव • 3) मौत ~ कलमकार सरस्वती शर्मा (सुबेदी) १) कवि कैसे बनते हैं एक दिन बात-बात में पता चला किसामने वाला कवि हैअचानक मन में सवाल आयाकवि कैसे बनते हैंकविता कैसे लिखते हैंपूछ बैठा कवि सेजो…
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आखिर कब सुधरेंगे हम? कितनी जानें जाएंगी?
पता नहीं माहौल ऐसा क्यों बन चुका है। इंसान में मानसिक विकृतियाँ उसे एक अलग ही रूप में प्रस्तुत कर देती हैं जो एक सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं होता। संकीर्ण मानसिकता के चलते अनेकों बार गंभीर अपराध हो जाते हैं। आज हम सभी को अपने भीतर एक सकारात्मक सोच लानी है जिससे एक आदर्श…
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प्रीति शर्मा ‘असीम’ जी की दस कविताएं
१. ताज के सामने ताज के सामने,छाते में,दुकान सजाए बैठा है। वह एक आम आदमी है।हर किसी के,सपने को खास बनाए बैठा है। ताज के सामने,छाते में दुकान से सजाए बैठा है। तस्वीरें बनाता है ।ताज के साथ सबकी,वह सब की,एक खूबसूरत,यादगार सजाए बैठा है। वाह री कुदरतजिंदगी की हकीकत मौत कब्र में सोई है।जिंदगी…
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गांधी जयंती विशेष- २ अक्टूबर २०२० को प्रेषित हुईं कविताएं
बापू की आत्मा स्वच्छ देश की कल्पना सिद्ध तभी हो पाएगीजब स्वच्छता सड़कों पे नहीं सोच में रखी जायेगी।अब सुधरे तो कैसे सुधरेगंदगी तो सोच में हैं।आज भी बापू की आत्माबस इसी अफ़सोस में हैं।देश तभी बदलेगाअगर सोच हमारी बदलेगीभारत मेरा सवरेगादिल्ली मेरी चमकेगी।अत्याचार बेखौफ थाहिंसा थी बाचालक्रूरता के हाथों में थीदेश की कमानगुलामी की…
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डॉ आनन्द किशोर जी की दस कविताएं
१) विदाई वही घरजहां बचपन गुज़राबिटिया काआज सजा हुआ हैआंगन में है गहमागहमीफेरे संपन्न हो चुके हैंफूलों से सजेविवाह-मंड़प में अभी-अभीअश्रुपूरित आंखों से निहारतीकभी घर कोकभी आंगन कोकभी बाबुल कोअपने जीवन-साथी के संगलांघने जा रही हैघर की दहलीज़सधे हुये मन सेसारी रीतियां निभाकरसभी रस्मों को आत्मसात करसभी रिश्तेदार,मात-पिता, बहन और भाईविदा कर रहे हैं उसेडबडबाई…
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राजीव डोगरा ‘विमल’ जी की दस कविताएं
1) नवीन जीवन चलो चलते हैं फिर सेजीवन की तलाश मेंकिस अजनबी शहर कीअनजान राहों पर।चलो फिर से बटोरते हैंउन ख़्वाबों कोजो टूट कर बिखर गए थेकिसी अनजान शख्स कीबिखरी हुई याद में।चलो फिर सेउन दिलों कोधड़कना सिखाते हैं,जो टूट कर बिखर गए थेमरती हुईइंसानियत को देखकर।चलो फिर सेनवीन जीवन कीतलाश करते हुए,मानव मे सच्ची…
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शहीद भगत सिंह जयंती- 28 सितंबर
हिंदी कलमकारों ने शहीद भगतसिंह को नमन करते हुए उनके स्मरण में कुछ कवितायें प्रस्तुत की हैं। आइए इन्हें पढ़ हम भी क्रांतिकारियों के जीवन और योगदान को जानें। मेरा रँग दे बसन्ती चोला, मेरा रँग दे। मेरा रँग दे बसन्ती चोला। माय रँग दे बसन्ती चोला॥ क्रांँतिवीर सरदार भगत सिंह वतन परस्ती खून में…
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बेटी दिवस 2020
बेटियां घर के आंगन में फुल खिल जाती,जब खुल के हंसती है बेटियां,पुरुष के कदम से कदम मिला कर,नित दिन चलती बेटियां ! हर क्षेत्र में परचम लहराती,अपनी लोहा मनवाती बेटियां,फिर भी क्युं बोझ है लगती,गर्भ में ही मारी जाती है बेटियां! क्युं अब तक स्वतंत्र नहीं है,सिसक रही है बेटियां,कभी ताना पहनावा पर तो,कभी…
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मेरी १० कविताएं~ मधुकर वनमाली
बांसुरी वनों में उगता घना हूँबेंत का कोमल तना हूँकोई जाके काट लायाआह कैसा घात पाया छील के चिकना हुआ हूँएक से कितना हुआ हूँमले मुझ पे तेल देखोमनुज का यह खेल देखो क्या हुआ जो खोखले हैंछिद्र मुझ में कई बने हैंपुत गया है रंग मुझ पेछैलों का है संग मुझ से देवता ने…