Category: विशेष दिन
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शब्द नहीं, संसार है माँ
शब्द नहीं, संसार है माँखुद में ही त्योहार है माँ।हो गरीब या अमीर कीएक पवित्र प्यार है माँ।दुख, सुख, फिक्र, सब्ररात, दिन इन्तजार है माँ।गुस्सा, झिड़क, चिंता, खुशीलाड़ ओ पुचकार है माँ।अच्छा, बुरा, पसंद, नापसंदबच्चों की जानकार हैं माँ।लोरी, थपकी, मान, मनौवलडांट और फटकार है माँ।घर में सब अभिनय करतेसबसे अहम किरदार है माँ। ~…
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बुद्ध पूर्णिमा: सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध तक का सफर
वैशाख माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार भगवान विष्णु के नवम अवतार भगवान बुद्ध को माना जाता है। इसी दिन बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। बौद्ध धर्म के सबसे बड़े धर्मवेत्ताओं में से एक भगवान बुद्ध ही है। जिन्हें बौद्ध धर्म के…
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वो तुम्हें हर जगह दिख जाएगा
वो तुम्हें हर जगह दिख जाएगा ग़ौर से देखोगे तो भगवान नज़र आएगा कहीं खेतों में घूप की चादर ओढ़े हुए तो कहीं सड़को के सन्नाटे में लेटे हुए कहीं अन्न उगाते हुए तो कहीं इमारतें बनाते हुए वो तुम्हें हर जगह दिख जाएगा ग़ौर से देखोगे तो भगवान नज़र आएगा कहीं कोई अपनी उदासी…
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क्योंकि मज़दूर हूँ
दुनिया के सामने तस्वीर हमारी सब के जुबा पे नाम हमारी फिर भी ना कोई पहचान हमारी क्योंकि मैं मजदूर हूं दुनिया हो गई एक साथ आज सबके आगे फैला हाथ ऐसी हो गई दशा हमारी क्योंकि मैं मज़दूर हूं रोटी के लिए मर रहा हूं घर जाने को तरस रहा हूं फिर भी ना…
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मज़दूर है बहुत मजबूर
समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है ये जिसे हम मज़दूर शब्द से नवाज़ते है, कई क़िस्मों का है ये मज़दूर। बस नज़र आपकी है कि किस मोड़ पर वो सोच बैठे कि हाँ ये है मजबूर माफ़ी चाहूँगा ‘मज़दूर’। आइए इस कविता से जोड़ते हुए आपको मज़दूर दिवस की बधाइयाँ देता हूँ……. हाँ मज़दूर है…
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मजदूर दिवस नहीं मजबूर दिवस
जिस दिन भारत की यह तस्वीर बदल जाएगी सच उस दिन देश की तकदीर बदल जाएगी गरीबों और अमीरों के बीच बहुत गहरी खाई है जिस दिन यह गहराई थोड़ी सी भी भर जाएगी सच उस दिन देश की तकदीर बदल जाएगी कागजी दावे नहीं जब योजना घर तक जाएगी बिना कर्जे के जिंदगी जब…
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मजदूर हम मजदूर
कभी छोटू, कभी रामू काका, तो कभी जमुना बाई, तो कभी पसीने से तर-बतर रिक्शा और ठेला खिंचते! कभी ऊँची ऊँची अट्टालिकाआओं पर अपने घरों का तामम भार उठाये! हाँ घर से कोसों दूर, कभी बेघर, तो कभी मजबूर, हाँ सही सूना आपने मजदूर हम मजदूर! ~ अभिषेक अभि
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मजदूर बना मजबूर
मजदूर बना मजबूर हां मजदूर हूं मै। बेबस और मजबूर हूं मै।। काम देखकर स्वप्न दिखाकर मुझको तुमने अपना लिया। आती देख मुसीबत मुझ पर तुमने मुझको ठुकरा दिया।। लाचार और विवश होकर के मैंने अपना घर छोड़ा। मुसीबत में मै तेरे जीवन का बन गया एक रोड़ा।। हाथ पकड़ मुझे उठा ऐसे ना साथ…
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लाल हरी चूड़ियां
यहां की प्रत्येक महिला को साहब, बहुत भाती हैं ये लाल हरी चूड़ियां ! श्रृंगार का प्रमुख भाग बनता इनसे, चाहे युवती हो या हो चाहे बुढ़िया ! क्या मालूम है ये कड़वा सच इन्हें, हमें काम कितना करना पड़ता है? कांच के टुकड़े जुटाने में हमें यहां, धूप में भूखा ही सड़ना पड़ता है!…
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मेहनतकश मजदूर हूँ
मैं मेहनत कश मजदूर हूँ हालातों से थोड़ा मजबूर हूँ खून पसीना एक करता हूँ अपने परिवार का पेट भरता हूँ सुन्दर सपनों की दुनिया मे जीता हूँ उम्मीदों का आकाश निहारता रहता हूँ अपने कर्म पर ही भरोसा करता हूँ अच्छे दिनों की आस पर जिंदगी जीता हूँ ये असीमित आसमान ही मेरा मकान…
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मजदूर का दर्द
पूरा विश्व परेशान तो इस नोबल कोरोना रूपी महामारी से भी है, लेकिन बच्चो एवं अपनी भूख मिटाने के लिये परेशान तो मजदूर ही है। अब जो अमीर घर बैठे पकवान खा रहे है, उनके पीछे जो पसीना लगा है वो मजदूर का है। जो देखने मे अत्ति सुंदर भवन बने है, उनके पीछे भी…
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मजदूर का जीवन
किसी भी बोझ से न थकता हूं वक्त की चोट से न रुकता हूं बस दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करता हूं मैं । सपनों के आसमान में बिना गाड़ी बंगले के आराम में अपने कच्चे मकान में जीवन जीता हूं मैं । फटे पुराने लिबास पहने कंधो पर जिम्मेदारी ढोने किस्मत का…
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मजदूर
कभी इंटे उठाता। कभी तसले, मिट्टी के भर-भर ले जाता। पीठ पर लादकर, भारी बोझे, वह चंद सिक्कों के लिए, एक मजदूर, कितना मजबूर हो जाता। ना सर्दी, ना गर्मी से घबराता। मजबूरी का, फायदा ठेकेदार उठाता। इतने पैसे नहीं मिलेंगे। मन मारकर, जो देना है दे दो मालिक, कह कर चुप रह जाता। मजदूर…
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मैं मजदूर हूँ
हाँ, मैं मजदूर हूँ, बेबश हूँ, लाचार हूँ, बुझाने भूख पेट की, गालियाँ खाता, सिसकता भ्रष्टाचार हूँ। परिकल्पनाओं को तुम्हारी साकार मैं करता रहूँ, पय को तरसती अँतड़ी को आशाओं से भरता रहा। धर्म कोष को तुम्हारे हरदम बढ़ाता मैं रहूँ, कलुषित हाथों से धवल कपूर सा जलता रहा यज्ञ की समिधा में काले तिल…
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हम मेहनतकश
नसें हमारी उभड़ गयी, तन से बहता पानी है, हम मेहनतकश विश्व के यही हमारी निशानी है, खून-पसीना एककर हम चैन की रोटी खाते है, नहीं माँगते भीख किसी से अपने दम पर जीते हैं, मेहनत हमको सबसे प्यारी, मेहनत है ईमान, मेहनत पर जो आँख दिखाये, खड़े हो सीना तान, अपने दम पर हम…
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हां! मै मजदूर हूं
संज्ञा में मै भूसा कपूर हूं! हां! मै मजदूर हूं मै भूखा सूखा रहता हूं पैदल ही चलता हूं आंधियों को सहता हूं पसीने में भीगता हूं फसलों को सींचता हूं दुबिधाएं ही लीपता हूं पास ही हूं, कहां दूर हूं? हां! मै मजदूर हूं पेट तो कभी भारत नहीं मेरा भूख कभी मरता नहीं…
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गंगा-घाट
युगों-युगों से यात्रा मेरी, तेरे साथ-साथ चलती रही। जन्मों-जन्मों से गुजर कर, तुम पर ही तो आ के थमती रही। जिंदगी के एक घाट से, मौत के, दूसरे घाट तक का सफर। युगों-युगों से ना बदला है। ना बदलेगा । जन्मों- जन्मों का यह सफर। देखता हूँ.. तेरे घाट पर, जीवन का अनूठा ही फन।…
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गंगा जन्मोत्सव- ३० अप्रैल २०२०
माँ गंगा जिन्हें सभी नदियों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। जो त्रिपथ गामिनी के नाम से भी विभूषित है। वास्तव में माता गंगा पराशक्ति माता जगदम्बा की अनंतानंत महाशक्तियों में से एक है। सृष्टि सृजन करते समय माता दुर्गा ने सात महाशक्तियों को अर्थात सात श्रेष्ठ नदियों को भगवान ब्रह्मा जी को प्रदान की थी।…