१५ अगस्त- जश्न आजादी का

भारत का स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिए किसी त्योहार के कम नहीं है। इस वर्ष कोरोना महामारी की वजह से रौनक कुछ कम जरूर हुई है लेकिन मन में उत्साह जरा भी कम नहीं है। इस देशप्रेम की भावना और विचारों को कलमकारों ने अपनी कविताओं के जरिए हम तक पहूँचाने की कोशिश की है। आइए राष्ट्र-प्रेम से सराबोर इन कविताओं को हम भी दिल से पढ़ें।

आजादी का जश्न

है दिवस वही, है जोश नया
देश फिर आजादी का जश्न मनाएगा
बच्चा, बूढ़ा हो या हो जवान
सब मिलकर “जय हिंद” के नारे लगाएगा

वतन की आजादी की खातिर
वीरों ने बड़ी कीमत चुकाई थी
संघर्ष भरी उस लड़ाई में ना जाने
कितनों ने अपनी जान गंवाई थी

गुलामी के ग्रहण ने देश को
घोर अंधकार में डाला था
कि आज़ाद फिज़ा में सांस लेने को
हुआ हर वीर जवान मतवाला था

सन सत्तावन से सैंतालीस तक निरंतर
चला वह युद्ध निराला था
उनके संघर्षों से मिटा तमस गुलामी का
फैला हर ओर नवीन उजाला था

कितनी माँओं ने खोया अपने लाडले को
कितने मांगों ने संदूर मिटाया था
बचाने खातिर देश के अस्तित्व को
उन शहीदों ने वीरगति को पाया था

आज इस विशेष दिवस पर हमें
केवल इतना ही प्रण लेना है
देश की अस्मिता और गरिमा को
अनन्तकाल तक मिटने नहीं देना है

है देश का गौरव अब हमारे हाथों में
कि इसकी आन को अनश्वर बनाना है
बन कर समर्पित और कर्तव्यनिष्ठ
वतन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

दीपिका आनंद
कलमकार @ हिन्दी बोल India

स्वतंत्रता दिवस

संग अपने हर्षोल्लास लेकर
पुनः स्वतंत्रता दिवस आया है
नमन उन वीरों को जिनके कारण
हमने स्वतंत्र भारत पाया है

जिनके शौर्य से परतंत्रता हारी
स्वतंत्रता का हुआ था आगमन
स्मरण करें उनके बलिदानों को
देश के अमर जवानों को नमन

भक्ति करें अपनी मातृभूमि की
उर में देशप्रेम की ज्योति जले
मानव जीवन देना जब भी प्रभु
भारतभूमि में ही जन्म मिले

आलोक कौशिक
कलमकार @ हिन्दी बोल India

राष्ट्रहित का भाव जगे

मन अर्पण मेरा तन भी अर्पण
राष्ट्र रक्षार्थ हो जाऊँ कण-कण
प्राण जाये पर बोले ह्रदय तरंग
मातृधरा का न हो पाये भंजन
भाव यहीं जग जाये जन-जन

राष्ट्रविरोधी सुर ना सहन हो
ऐसे विचारों का ही दहन हो
राष्ट्रप्रेम को खुला गगन हो
गर्व करे भारत पे सब मन
भाव यहीं जग जाये जन-जन

सर्वधर्म को सम्मान यहाँ है
मिलता कहीं ऐसा मान कहाँ हैं?
भूलोक नही दूजा स्वर्ग जहाँ है
घुल जाऊँ मृण में इसके हो जाऊँ कंचन
भाव यहीं जग जाये जन-जन

यहाँ न कोई किंचित भी पराधीन है
सब स्वयं के ही विचारों के अधीन है
अधिकारों संग कर्तव्यों से रचा एक विधान है
विधि पालन करें हम सदा हर एक क्षण
भाव यहीं जग जाये जन-जन

बलिदानों से बनी है ये मिट्टी
सुध रखें सदा वीरों की आहुति
बिना इनके स्वतंत्रता कहाँ मिलती !
विस्मृत न हो बलिदानी का पूजन
भाव यहीं जग जाये जन-जन

जाति-धर्म का भेद मिट जाये
सभी भारतीय एक हो जाये
शत्रु-राष्ट्र तब क्यों कुछ कर पाये
आवश्यक हो तो स्वयं हो जाऊं हवन
भाव यहीं जग जाये जन-जन

विनय कुमार वैश्कियार
कलमकार @ हिन्दी बोल India

हम भारत के सैनिक

हम भारत के सैनिक हैं यह, देश हमें अति प्यारा है।
इसकी रक्षा करना सबसे, पहला फर्ज हमारा है।

इसकी पावन मिट्टी में हम, खेलकूद कर बड़े हुये।
फल, औषधियाँ, अन्न-जल पा, स्वस्थ, पुष्ट हो खड़े हुये।
वृक्ष, पुष्प, पर्वत मालायें, प्रकृति ने रूप सँवारा है।
इसकी रक्षा करना सबसे, पहला फर्ज हमारा है।।

मान और सम्मान देश का, कभी नहीं जाने देंगे।
अपने भारत की धरती पर, शत्रु नहीं आने देंगे।
पर्वत की चोटी पर चढ़कर, दुश्मन को ललकारा है।
इसकी रक्षा करना सबसे, पहला फर्ज हमारा है।

पूर्व दिशा में सूरज उग कर, नई रोशनी भरता है।
देश गान गा मधु लय स्वर में, झर-झर झरना झरता है।
जागो, उठो! चूम लो चोटी, रवि ने हमें पुकारा है।
इस भारत की रक्षा करना, पहला फर्ज हमारा है।

श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’
कलमकार @ हिन्दी बोल India

स्वतन्त्रता दिवस की कहानी

दिन था वो शुक्र सन् सैंतालिश महीना अगस्त पंद्रह की,
रचा नया इतिहास बनी कहानी स्वतंत्र भारत की ।।

देकर लहू लुटाकर अपना सर्वस्व किया समर्पित देश को,
जाने कितने त्याग दिये इस धरती के वीरों ने मिटा कर खुद को।।
कतरा-कतरा बहाया पर थमे नहीं उनके पाँव,
जला कर मशाल क्रांति का बढ़ते रहे वो क्या धूप क्या छाँव।।

बेड़ियों मे जो जकड़े थे देश के लोग,
बनाया था जिसने हम सबको अपना गुलाम,
अब वक़्त नहीं था सहने की जाग चुकी थी आवाम,
कफनों को लेकर हाथों मे निकल पड़े थे हमारे शूर वीर जवान,
भुला ना सकेंगे कुर्बानीयों को उनकी जिनसे हैं हमारी शान।।

जर्रा-जर्रा चीख पुकारा भारत माता की जय,
बजा बिगुल लड़े डट कर हुई दुश्मनों की पराजय।।
लेकर इंकलाब का नारा खदेड़ा अंग्रेजों को,
चुम गए फांसी विरंगनो की हुई गोद सुनी,
सत-सत नमन उन शूर वीरों की विजय को।।

लिप्त हुए तीन रंगों की तिरंगे में,
अमर शहीद कहलाये वो भूली नहीं जाए जिनकी कहानी,
लिखी इतिहास के पन्नों पर स्वतन्त्रता की ये कहानी,
आज दोहराए चलो फिर से शूर वीरों की कुर्बानी।।

सरिता श्रीवास्तव
कलमकार @ हिन्दी बोल India

शान बढ़ाएं भारत का

चलो चलें हम पर्व मनाएं
आजादी के उत्सव का
मिलकर हम सम्मान बढ़ाएं
वीरों के बलिदानों का..।।

आन मान सम्मान समर्पित
आज तिरंगे की खातिर
मिलकर चलो बढ़ाएंगे हम
शान आज तिरंगे का..।।

वीरों की वीरता की गाथा
हम न इसे भुलाएंगे
सदा आभारी हम सब होंगे
वीरों की कुर्बानी का..।।

जिन वीरों ने सर्वस्व लुटाया
भारत की आजादी में
नमन आज करते हैं हम
उन वीर सपूत जवानों का..।।

भारत माता के वीरों का
चलो चलें वंदन करते है
फहराएं हम आज तिरंगा
शान बढ़ाएं भारत का..।।

चलो चलें हम पर्व मनाएं
आजादी के उत्सव का
मिलकर हम सम्मान बढ़ाएं
वीरों के बलिदानों का..।।
वीरों के बलिदानों का..।।

विजय कनौजिया
कलमकार @ हिन्दी बोल India

भारत के वीर सैनिक

हमारा भारत वह महान और सर्वश्रेठ देश है,
जिसकी मिट्टी में हमारा जन्म हुआ और,
इसकी मिट्टी की खुसबू हमारे कण कण में है,
भारत हमारी मान है।
भारत हमारी शान है।

नही तो यू ही महान नेता
सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गाँधी,
भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जी ने
भारत की आजादी के लिए
अपने प्राण न न्योछावर किये होते,
उन्ही के नक्शे कदम पर
हमारे देश के वीर सैनिक चल रहे,

क्या गर्मी, क्या ठंड, क्या बरसत, क्या तूफान,
कुछ भी नही उनके लिए अपने वतन के आगे,
उस कड़ी धुप में खड़े रहना,
हिमालय पर बर्फ के चादर ओढ़े
अपनी मार्ग पर डटे रहना,
आँधी तूफान, बरसात को भी तोड़ते हुए
अपने कठिन मार्ग पे डटे,
हमारे लिए, अपने देश के लिए,
अपने वतन के लिए मरते जीते रहे,
ताकि हम सुकुन से जी सके।

भूल गए वह घरो के रास्ते,
भूल गए वह परिवार के सदस्य,
सिर्फ याद था अपना वतन, अपना देश।
यही की मिट्टी में जन्मे,
यही की मिट्टी में समा गए
वह वीर सैनिक।
अपने देश के लिए, अपने वतन के लिए
प्राण त्याग कर जाते वह वीर सैनिक।
हमारे देश की गौरब की प्रतिष्ठा
बढ़ाते है वह वीर सैनिक।
उन वीर सैनिको को हमारा शत शत नमन,
जय हिन्द, जय भारत।

ऋचा प्रकाश
कलमकार @ हिन्दी बोल India

आज़ादी

मिली हमें आजादी कैसे
इसका कोई मोल नहीं
असंख्य वीर हुए बलिदान
इसका कोई तोल नहीं।

माँ ने खोया बेटे को
बहन ने खोया भाई को
पिता पुत्र का मोह था टूटा
पीङा सही नव-ब्याहता ने।

खोया हमनें वीरों को
तब पाईं है आजादी
दी हैं छाया अपने बल से
तब छूटी हैं गुलामी।

वीर भगतसिंह और झाँसी
भी खूब लड़ी है मर्दानी
घर भी छोड़ा,कर्ज था थोड़ा
लक्ष्य था सिर्फ आजादी
छोड़ पुस्तकीय ज्ञान
धर्म भी था सिर्फ आजादी।

हिंसा अहिंसा का मार्ग अपनाया
गरम-नरम दल दोनों ने जोर लगाया
तब मिली हैं आजादी
इसका कोई मोल नहीं
असंख्य वीर हुए बलिदान
इसका कोई तोल नहीं।

ललिता पाण्डेय
कलमकार @ हिन्दी बोल India

आजादी गान

पंद्रह अगस्त का दिन है आया
स्वतंत्रता का पावन दिवस आया
आजादी का 73 वां साल आया
लाल किले पर फहराया तिरंगा
देश के अमर शहीदों की बलिदानी
मेरे भारत के वीरों की कुर्बानी
भारत मां के आजादी की खातिर
उन वीरों को हम करें नमन
भगत सिंह, सुभाष, आजाद ने
बिस्मिल्लाह, तात्या टोपे, खुदीराम ने
सिर पर कफन बांध चले जब
भारत की हर नारी है लक्ष्मीबाई
जैसी माता थी जीजाबाई
मस्तक मां का ऊंचा करने
गोरों को धूल चटा करके
वीरों ने फहराया तिरंगा
जाँबाजी से विजयश्री पाकर
भारत में स्वर्णिम इतिहास रचाया
श्रद्धा से नमन उन वीरों को
जिनके साहस शौर्य और पराक्रम से
वतन हमारा हुआ आजाद

वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया
वीरों की पहचान तिरंगा
समर्पण, निस्वार्थता का प्रतीक केसरिया
श्वेत देता शांति, सच्चाई का संदेश
समृद्धि, ऊर्जा के भाव से भरा हरित रंग
अशोक चक्र देता ईमानदारी, न्याय
राष्ट्रीय ध्वज देता सन्देश गर्व
स्वतंत्रता, एकता,सम्मान का
जन गण मन है राष्ट्रगान हमारा
वंदे मातरम राष्ट्रगीत हमारा
एकता अखंडता पहचान हमारा
जाति धर्म भेदभाव से परे
भारत का पहचान हमारा।

डॉ भवानी प्रधान
कलमकार @ हिन्दी बोल India

कोरोना और स्वतंत्रता दिवस

इस बार का स्वतंत्रता दिवस
कुछ भयाक्रांत-सा हो गया है,
स्वतंत्रता तो है पर घरों में कैद-सा है
ऐसा चीन तूने क्या कर दिया?
हँसते-खेलते इंसान को
तूने, झकझोर कर रख दिया है
आजादी के इस दौर में
हमने खुद को कैद करके रखा है
कैसे बाहर जाएँ ?
वहाँ तो कोरोना का पहरा है
ऐ चीन तू संभल जा,
नहीं तो शरबत तू बन जाएगा
हम हिंदुस्तानी हैं, हम से मत उलझ
वरना, मिट्टी में मिल जाएगा
तू खुद को ड्रैगन समझता है,
हमारे पास जंगल का खूंखार शेर है
मत छेड़ उसे तू ऐ चीन
उसकी दहाड़ से हीं डर जाएगा
मत उलझ ऐ चीन हमसे
तू मिट्टी में मिल जाएगा

निशा सिन्हा
कलमकार @ हिन्दी बोल India

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