मोबाइल फोन के आदी

जैसे एक सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार हर तकनीकी के फायदे और नुकसान भी होते हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसका इस्तेमाल किस ढंग से करना चाहते हैं। मोबाइल और इंटरनेट के क्षेत्र में बड़ी प्रगति हुई है, इनके बिना खुद में ही कुछ कमी सी लगती है। सभी लोगों पर इस क्रांति का असर बखूबी चढ़ चुका है। कलमकार खेम चन्द ने अपनी कविता में इसके एक पहलू पर चर्चा की है।

ये आईडिया, ये एयरटेल, ये वोड़ाफोन
सबने बीएसएनएल को पछाड़ दिया है।
तुम बात कर रहे हो संस्कारों की
जीओ ने हम सबको बिगाड़ दिया है।
खुश थी अतीत में कितनी जिन्दगी
वाह विज्ञान के चमत्कार,
ये तुने! कैसा खिलवाड़ किया है।
तारतार हो रही इज्ज़त रिश्तों में
कैसा ये जुगाड़ दिया है।
परिपक्व था रिश्ता जो हमारा
उसको आधुनिकता ने उजाड़ दिया है।
बची थी जो सांसें उधार कहीं
उनकी जड़ों को भी उखाड़ लिया है।
नैनों में बैठाये बैठे थे स्वप्न हज़ार
सबको कैसे कैसे ताड़ लिया है।
वाह! खुशियों की इस दुनिया में रहने वालों
कैसा ये जीओ के लिये, दुनिया को छोड़कर लाड दिया है।
वो रास्ते जिन्हें भूला बैठे हैं।

~ खेम चन्द

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।
https://www.facebook.com/hindibolindia/posts/459113418329169
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