साल २०२१ का आगमन – रचनाकारों के संदेश

१. नव वर्ष की पहली सुबह ~ प्रियंका जेना

है नया साल ये आया,
नव वर्ष की पहली सुबह,
नए दिन के साथ नये साल का ये आगाज़ है,
लगता है कुछ होने को है बहुत खास,
नए साल के पहले सूर्योदय की लालिमा
कह रही मानो ये हमसे आज,
कि वर्ष 2021 लाया संग खुशियों की सौगात है,
सभी का जीवन हो मधुरमय
और जग में उल्हास हो
इसी कामना के साथ नव वर्ष का स्वागत है!


२. नव वर्ष ~ वर्षा यादव

नव किरण नवजीवन, नव उमंग भर दो।
मां अंबे नव वर्ष में, सब मंगल कर दो।
सब अपनों के जीवन में, खुशियां ही खुशियां भर दो।
मां अंबे नव वर्ष में, सब मंगल कर दो।
पलकों की सीप में पलते, सपनों को जीवित कर दो।
मां अंबे नव वर्ष में, सब मंगल कर दो।
दुर्गम जीवन के रास्ते, सुगम सरल कर दो।
मां अंबे नव वर्ष में सब मंगल कर दो।
व्याकुल बीता पिछला बरस, नव वर्ष सकुशल कर दो।
मां अंबे नव वर्ष में, सब मंगल कर दो।
बीते वर्ष के स्याह पलों को, जननी धवल कर दो।
मां अंबे नव वर्ष में, सब मंगल कर दो।


३. नव वर्ष ~ राज कुमारी

ज्यो तरु की डलिया, कपिल जने नवीन हो
आए नव वर्ष त्यों, जैसे मेघ कुलीन हो
गुजर गए वर्ष नमी अँधेरों की
प्रसन्नता से छलके, लबों पर जैसे प्रवीण हो!!

ये बादल की लहरें भी कुछ कह रही
वसंत का आगमन, कोयल झूम कर गा रही हो
गुरुजन दे हमें आशीर्वाद यहाँ सच्चा
हर घर मे माँ सरदे का वास हो!!

कोपले है अब कुछ नई निकले
पुष्पित फलित भी हर डाल हो
इस जगत मे नव निड़ का हो निर्माण
गरीब, उजड़ो का भी उद्धार हो!!

नव वर्ष, नव दृष्टि और नव योजना हो
ना बेघर, निर्वस्त्र, सपने सभी के साकार हो
द्वेष की दुनिया को जड़ से मिटाओ
बस नित, प्रेम का ही प्रसार हो!!

बैर भाव सभी का दूर हो, दूर रहे सब का कष्ट
शांति, सुधा विश्व मे, ज़ब आतंकी का सर्वनाश हो
उठो!और मिटा दो सारे मन के क्रोध
जो ह्रदय मे दबी छिपी अभिलाषा हो!!

कदम हमेशा अडिग रखना तुम
पुलकित होंगे मन, ज़ब मंजिल पर जोर हो
दुनिया के इस रंगमंच मे, गुजरी बात है पुरानी
स्वागत है नव वर्ष का, नित नव काज हो!!


४. नववर्ष की कामनाएँ ~ प्रभात कुमार गौतम

नववर्ष मे खुशियों के
नवाकुंर फूटे सबके जीवन में,
नवल प्रभात हो सुनहरा
शुद्धि हो तन मन मे,
सबको समृध्दि प्राप्त हो
लटके न कोई किसान वन मे,
रहे बेटियाँ सुरक्षित हर पल
खेलती रहे अपने आँगन मे,
मरे न जवान सीमा पर
स्थापित हो शान्ति विश्व चमन मे,
युवाओं को मिले रोजगार
भरे पेट सबका कमी न हो भोजन मे,
स्वछन्द हो हर मानव
जैसे होते है परिन्दे गगन मे


५. अंग्रेजी नव वर्ष 2021 ~ मधु शुभम पाण्डे

बधाई दे रहे है क्योंकि, तेरी तारीखों से दिनचर्या है चलती ।।
चैत्र में होता हिंदी नव वर्ष, जिसमें साल नही प्रकृति भी बदलती।।

न होती हैं सर्द रातें,न कोहरे की घनी चादर होती।।
हिन्दू वर्ष का होता आगमन,जिस दिन चैत्र प्रतिपदा होती।।

सिंदूरी सी भोर लिए, पंछी कलरव करते आते।।
अवनी और अंबर भी, नव वर्ष के गीत है गाते।।

आती है दुर्गा मैया, भक्ति, आराधना करते हम सब।।
उल्लासपूर्ण नव वर्ष का स्वागत करते है हम सब।।

हमारे ग्रंथो में भी लिखा है,जो काम आए उसका सम्मान करो।।
लेकिन अपने धर्म का तुम सदा कर्तव्य पालन करो।।।

हम कैलेंडर बदलेंगे और दिनचर्या चलाएंगे इन तारीखों से।।
पर बदलना नही संस्कृति को चलेंगे हम अपने ग्रंथो से।।

हमारे धर्म मे तिरष्कार का कोई स्थान नही है।।
नही पसन्द हो फिर भी उसका अपमान नही है।।

हिन्दू सभ्यता सदियों से भाईचारा निभा रही है।।
हिन्दू संस्कृति विदेशों में भी फल फूल रही है।।

यज्ञ, हवन और पूजा पाठ से नव वर्ष का करो स्वागत।।
धन, सम्पदा आएगी तभी ईश्वर की करोगे आवभगत।।

बदलो अपने विचारों को, वर्ष बदलने से कुछ नही होता।।
बगुला रंग के कारण भी हंस जैसा विवेकी नही होता।।


६. नया साल नई उम्मीद ~ पूजा भारद्वाज

नया साल फिर नई उमंग फिर नई उम्मीद
मिलकर करें प्राथना इस नए साल में
ना आए कोई विपत्ति ना संकट
मेरे देश पर इस नए साल में
खुशियों से मनाए नया साल
भूल कर कोरोना का डर
आओ मिल कर बनाए जशन नये साल का
दिल खोल कर स्वागत करें आने वाले साल का
जो सपने पूरे ना हो सके गुजरे कोरोना काल में
आओ करें पूरे सभी सपने इस नए साल में
मनाएं खुशी और रोशन करें अपना जहां नए साल में
भरें उड़ान नए होंसलों की इस नए साल में
आओ मिल खुशियों की सौगात बांटें इस नए साल में
ना हो कहीं दंगे फसाद, और ना धरने का जाम हो
लें शपथ इस बात की हर चेहरे पर केवल मुस्कान हो
ना मंदिर हो ना मस्जिद हो हर धर्म की यही आवाज़ हो
देश हमारा फले फूले मानवता पूर्ण समाज हो।
विकसित हो देश हमारा इस नए साल में
सुख समृद्धि से फूले फूले देश हमारा इस नए साल में
सुख शांतिमय रहे धरा से गगन हमारा इस नए साल में।


७. नववर्ष करुं अभिनंदन ~ मनीषा झा

हृदय खोल करुं अभिनंदन,
खुशियां संग पधारो आंगन,
अर्चन करुं कर लें पुष्प संग,
हे नूतन वर्ष करुं अभिनंदन!!

हे‌ ईश्वर तुझे करुं प्रणाम,
कर रही हुं बस इतनी-सी मांग,
समस्त विश्व का हो कल्याण,
जीवन थोड़ा सा हो आसान!!

संकट बहुत आए गत साल,
आ कर हर लो यह काल,
पुनः ना ऐसा साल दिखाओ,
जनमानस हुए बहुत बेहाल!!

हे आंग्ल तिथि के नववर्ष,
स्वीकारा हमने तुझे सहर्ष,
उत्साह प्रेम समर्पण संग,
स्वागत में रहते हर वर्ष!!

हम भी एक नए विश्वास के संग,
ले आशा की मन में नई उमंग,
शुरुआत करुं भर हृदय तरंग,
अब आशा ना तू करना भंग!!

अबकी बार लें मन में आस,
इंतजार कर रही है तू खास,
जो भूगत चुके हैं हम गत साल,
अब ना करना वैसा हाल,
कोरोना से करना निजात!!

होगा हमके बड़ा उपकार,
अभिनंदन करें हम बारंबार!!


८. अलविदा 2020 ~ अल्पी निशान्त वार्ष्णेय

बहुत कुछ सिखाया
इस साल ने मुझे
कुछ लोगो से मिलाया,
लोंगो से अलग कराया मुझे
हम कहाँ से कहाँ हो जायेंगे
कभी न हमने सोचा था
पर इस साल ने बहुत
कुछ सिखाया हैं मुझे

वो दुःख की घड़ी
वो एक-एक पल आँखे भरी ,
कौन अपना, कौन पराया
ये सब सिखाया हैं मुझे
जो देखे थे मैंने सपनें
बो सब हकीकत हो पाये मेरे
कुछ अपनों ने मुँह फेरा
तो अंजानो ने अपने गले लगाया
इस साल ……

नसीब नही थी रोटियाँ
हर किसी के नसीब में
कोई रोटी के लिये तड़पा
कोई भूखे पेट सोया
खाने की कीमत क्या होती
साहिब ये सब बतलाया मुझे
इस साल ……

कभी चलता था, लाखो का कारोबार
एक-एक रुपए के लिए, तरसाया मुझे
पैसे की क़ीमत क्या होतीं हैं साहिब
कुछ पैसो से, घर चलाना सिखाया मुझे

बक्त किसी का सगा नही होता
बक्त कब बदल जाये
ये सब बक्त ने समझाया मुझे
इस साल ……

खुद की एक नई दुनिया
अपनी नई पहचान
अपने आप को परखना
सिखाया मुझे
यादों से भरा ये साल
हमेशा याद आयेगा मुझे


९. मेरा नया साल ~ महेश राठौर सोनू

बीत गया यूं ही दिन और ख्याल आ गया
उन्होंने कहाँ ही नहीं कि नया साल आ गया
भला क्यों मनाये खुशियां हम नए साल की
सबने बधाई दी उनका बधाई देना रह गया
उन्होंने कहाँ ही नहीं कि नया साल आ गया

तरस गए मेरे कान उनकी आवाज सुनने को
छोड़ गया मुझे यूं ही यहाँ बस जलने को
जल जलकर मेरा हर अरमान राख हो गया
उन्होंने कहाँ ही नहीं कि नया साल आ गया

स्वपन की गली से कोई वापस चला गया
जितना भाग्य में था मेरे मिलता चला गया
नसीब शायद उनके हाथ की रेखा हो गया
उन्होंने कहाँ ही नहीं कि नया साल आ गया



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