भारत की सीमा के वीर जवान

सरहद पर देश के रक्षक वीर जवान तैनात रहतें हैं और इनकी वीरता की गाथाएँ जन-जन में देशभक्ति और शौर्य की ऊर्जा का संचार करतीं हैं। हिन्दी कलमकारों ने भारतीय सेना, वीर जवानों और शहीदों के प्रति अपनी भावना इन कविताओं अभिव्यक्त की है, आइए इन कविताओं को पढ़ें।

शहीदों का सम्मान ~ पवन सैनी

उनके तन की माटी से
इस धरा का सर्वत्र हरा,
वो वीर सरहद पर अड़ते हैं
आज मुल्क महफूज खड़ा।

तुम्हारे अहसानों का कर्ज
हम कभी चुका नहीं पाएंगे,
तुम शहादत के बाद भी
युगों तक गाए जाएंगे।

तुम अजर अमर हो शत्रुघ्न,
विश्व पटल पर छा जाओ
मातृभूमि का वर लेकर,
शत्रु विजय तुम पा जाओ

तुम हो सिंदूर तुम ही कंगन
तुम मेहंदी हो ईमान की,
खूब सँवरती है तुमसे
ये धरती हिंदुस्तान की।

मातृभूमि के मस्तक पर,
शत्रु रक्त अभिषेक करो,
तुम हो सपूत भारत के
रण में तय अपनी जीत करो,

मैं नमन करूं वंदन करूं
करूं शहीदों का सम्मान,
आज विश्व में गूँज रहा,
हिन्द सेना का गौरवगान।

~ पवन कुमार सैनी ‘पीके’
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHIT1220A

शहीदों को नमन ~ चन्दू कन्नौजिया

गलवान घाटी में हुई हिंसा
फिर पूरा देश रोया है।
कोरोना से बड़ा है सदमा
देश ने वीरों को खोया है।।

वो मारते मारते शहीद हुए हैं
किये सामना सब सीना तान।
बीस के बदले तैंतालीस मारे
अमर हो गए दे के बलिदान।।

चीन तू था पूर्व नियोजित
चली थी चाल उकसाने की।
हर वीर तुम्हारे पर भारी था
तुम करो जंग तो सामने की।।

उन वीरों ने जो अपना रक्त
देश के लिए बहाया है।
सबको मिलेगा मुँहतोड़ जवाब
परिवर्तन का युग आया है।।

पूरी दुनिया ने मान लिया है
चीन तुम भी अब मान लो।
अगर एहसास नहीं होगा तो
तुम पाकिस्तान से जान लो।।

चन्दू कन्नौजिया
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHI1220B

गलवन घाटी ~ राजेश कुमार वर्मा

लद्दाख की गलवन घाटी में
गद्दारों ने छल कर डाला है।
घाटी छोड़ने का वचन दिया
और पीछे से “वार” कर डाला है।

श्रृगाल रुपी चीनी भेडियो ने
भारत के शेरों को ललकारा है।
धैर्य आदम्य साहस से वीर जवानों ने
चीनी भेडियो को “चीर” डाला है।

खुद को अमर शहीद होकर
भारत मां की ताज बचा डाला है।
लद्दाख की गलवन घाटी में
चीनी गद्दारों ने ललकारा है।

सन् 1962 की भारत होने का
गद्दारों ने “भूल” कर डाला है।
सौगंध लिए मां भारती की
इन गद्दारों का “वध” कर डाला है।

लद्दाख की गलवन घाटी में
गद्दारों ने छल कर डाला है।
घाटी छोड़ने का वचन दिया
और पीछे से “वार” कर डाला है।

राजेश कुमार वर्मा
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHIT1220C

श्रद्धा के फूल (दोहे)~ श्याम सुन्दर ‘कोमल’

सीमा पर हैं हो गये, जो सैनिक कुर्बान।
उनके आगे तुच्छ हैं, सभी मान-सम्मान।।

शत-शत उनको है नमन, शत-शत बार प्रणाम।
सैनिक भारत देश के, फिर आए हैं काम।।

खेल जान पर देश का, खूब बढ़ाया नाम।
वीर शहीदो देश के, लाखों तुम्हें सलाम।।

किसी माँग की लालिमा, किसी गोद के लाल।
किशी शीश की छाँव थे, आज सभी बेहाल।।

आज चढ़ाते हैं तुम्हें, हम श्रद्धा के फूल।
कभी शहादत को नहीं, हम पाएँगे भूल।।

श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHIT1220D

तुझे मेरा सलाम ~ ललिता पाण्डेय

सपनों की दुनियां का,
एक ख्वाब पूरा हुआ।
तुम ख्वाब में मिले थें,
अब हकीकत बन चुके हो।

मातृ-पितृ की देहली छोड़,
अब बन मंजरी तेरे आँगन की,
महकने लगी हूँ।
तुम्हारी जाबांजी के किस्से,
जग को सुनाने लगी हूँ।
पैर ज़मीं कम,आसमां में लग रहे हैं।
ये सफर यू हीं चलता रहे,
नजर ना लगे…. किसी देह की,
यही ईश कामना करती हूँ मैं।

घर सुसज्जित था मेरा,
दुख का आना वर्जित था।

पर वक्त ने भेजा संदेशा,वापसी का
प्रिय बोले तुझे जीवन जीना पड़ेगा तापसी का
थी तैयार मैं भी रणभेरी को,
ये वादा था मेरा,उस सरहद के प्रहरी को।
चल दिया वो यूं ही,हल्की मुस्कान के साथ,
पर लिया वचन प्रिय ने हाथ के हाथ।

बोल! मेरी शहादत का पैगाम
जब भी आयेगा।
तू कुछ बोलेंगी या मौन हो जायेगी।
मेरे बलिदान में अश्रु बहायेगी या
तिरंगा हाथ में ले मेरा मान बढायेगी।
है अधिकार तुझे, देह मात्र दर्शन का

अंतिम मुखमंडल छवि अंतर्मन में रखने का।
पर जाते-जाते जयहिन्द की सलामी दे देना।
मेरी प्यारी मेंरे मातृभूमि के प्रेम को समझ लेना।
मन की पीड़ धधकती ज्वाला को,
समर्पित कर देना।
सुनो एक बार तुम भी मुस्कुरा देना।
निशब्द हूँ मातृ-प्रीत को देख तेरी प्रिय।
तेरी प्रीत का वचन मैं निभाउंगी।
तेरी शवयात्रा में एक अश्रु नहीं बहाउंगी।

बन शहीद की ब्याहता सारे फर्ज मैं निभाउंगी।
और चल दिए, नैनों में सपनों का अंबार लिए,
ना आई चिठ्ठी ना कोई पैगाम,
आया सिर्फ तिरंगे के साथ उनका सलाम।
अब अपना फर्ज मैं निभाउंगी,

तेरी शहादत में जयहिन्द का नारा लगाऊंगी,
पर अश्रु कैसें रोक पाऊँगी।
ये काठ का पुतला नहीं,
जनमानस सा हदय हैं मेरा,
यहाँ रक्त ना बैरागी!
जय हिंद!

ललिता पाण्डेय
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHIT1220E

देशभक्त ~ अभिषेक शर्मा

खून से सींचा भारत को वो,
देशभक्त ऐसे महान दिखे।
उनमें से कुछ के नाम बताऊं,
जो अपनी इस रचना में लिखे।।

देश है जिनका घर था ऐसे,
इस धरती पर वीर हुए।
स्वतंत्रता के लिए जिन्होंने,
अपने बलिदान भी हंसकर दिए।।

जितने देशभक्त हुए वो,
सलाम है सब के जज्बे को।
अंत समय तक लड़कर वो,
दिखा गए आजादी को।।

नाम था भगत सिंह जिनका वो,
ऐसे वीर यहां पर हुए।
हंसते-हंसते चढ़ गए फांसी,
देश प्रेमी वो ऐसे हुए।।

जिक्र जरूरी उस मां का भी,
जिसने इस वीर को जन्म दिया।
इंकलाब जिंदाबाद कह कर,
मां के वचन को पूरा किया।।

सुभाष चंद्र ये वीर थे ऐसे,
आखिरी वक्त तक है जो लड़े।
आजाद हिंद फौज बनाकर,
नव युवकों की पहचान बने।।

वीरांगनाओं में भी देखो,
झांसी की रानी आई।
अंत समय तक उसने देखो,
राष्ट्र रक्षा के झंडे फहराए।।

नाम उनका गर भूल गए तो,
हम सच्चे हिंदुस्तानी ना हो।
मंगल पांडे नाम था जिनका,
प्रथम स्वतंत्रता सेनानी है वो।।

मार्ग दर्शन पाकर जिनका,
हम सब को आजादी मिले।
महात्मा गांधी नाम था जिनका,
अहिंसा का रस्ता भी दिए।।

आजादी का एक है ये स्तंभ,
चंद्रशेखर आजाद भी थे।
चौबीस वर्ष की आयु में ही,
देश प्रति जो शहीद हुए।।

इतने वीर हुए इस धरा पर,
लिखने से भी मन ना भरे।
वीरों के लिए हर पल में लिखूं,
चित मेरा यह पल पल ही करें।।

अभिषेक शर्मा
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHIT1220F

शहीद हुआ सैनिक ~ पार्थ अवस्थी

जीवन भर बस मुझको इस देश की सेवा करना है
इस देश की खातिर जीना है इस देश की खातिर मरना है
हम रखवाले भारत मां के अपना शीश नवाते हैं
आता मौका जब जब भी है हम अपनी जान गंवाते हैं
भारत मां की रक्षा के लिए कभी रोटी घास की खाते हैं
उसकी रक्षा के लिए ही हम कभी बर्फ में ही सो जाते हैं
बस प्यार आपका ही है मां जिसने मेरी रक्षा की है
बस प्यार आपका ही है मां जिसके कारण ये जीवन है
इक दिन आे पल भी आयेगा जब गोद में में सो जाऊंगा
बस रक्षा करते तेरी ही इस मिट्टी में मिल जाऊंगा
देशवासियों से बस है इक अनुरोध हमारा
तुम जैसे प्यारे प्यारों से हो सम्मान हमारा
जब तिरंगे में लिपटकर घर अपने मै जाऊंगा
मेरी मां तुमसे मै खुब इतराऊंगा
बहन कहेगी उठ जा तू, तेरी आदत अब तक गई नहीं
तब बाबूजी धीरे धीरे आकर किस्से सहादत के सुनाएंगे
तब फक्र से मां के आंसू भी किसी कोने में छुप जाएंगे
था बेटा तेरा वीर बहुत, लौट के फिर से आयेगा
इंतजार करना मत मां मै लौट के वापस आऊंगा
ऐ ऊपर वाले जन्म मुझे फिर से इस आंगन में देना
इस बार मैं मां जब आऊंगा
तेरे आंचल का तेरी ममता का
मै सारे फ़र्ज़ निभाऊंगा
इस जन्म में तो बस एक ही ये फ़र्ज़ निभाना मुझको था
अपनी भारत मां का, ये कर्ज निभाना था मुझको

पार्थ अवस्थी
कलमकार @ हिन्दी बोल इंडिया
SWARACHIT1220G


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