मुझसे अब कुछ ना पूछो- हे प्रिये

कलमकार संदीप सिंह चाहत की भावना बता रहे हैं। कभी-कभी बोलने को तो बहुत होता है किंतु शब्द ही समाप्त हो जाते हैं

मेरे लफ्जो से अब तुम क्या-क्या पूछोगी
मेरा हर ख्याल तुम्हारा, मेरी हर सांस तुम्हारी,
मेरी आवाज तुम्हारी, मेरी हर बात तुम्हारी।
मेरी धड़कन हर पल तुम्हारे लिए धड़कती है।
जब मैं पानी पीता हूं तो बूंद बूंद लगता है,
की तुम मेरे अंदर जाती हो।
सुबह से शाम ऐसा कोई पल नहीं,
जब तुम मेरे दिमाग से अलग होती हो।
बस अब मेरे जेहन में यही सवाल है कि,
कब तुम मेरे बाहों में आकर मुझसे लिपटकर,
एक प्यारी सी कोमलता का एहसास दिलाओ।
हे प्रिये! और तुम कितना प्रिय बनोगी।
अब मुझे अपने पास बुला लो,
मेरे पास और कुछ नहीं है कहने को।
बस हर पल मेरे जेहन में यही सवाल चलता है।
मुझसे अब कुछ ना पूछो, अपनी बाहों में भर लो।

~ संदीप सिंह


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