प्यार का इज़हार

हम अपने प्यार का इज़हार नहीं कर पाते,
उन्हें लगता है हम किसी और को हैं चाहते।
हमसे है उनका नाता काफी पुराना,
फिर भी वे हमे क्यों समझ नहीं पाते।

क्या करूँ, कैसे दिलाऊ उन्हें यह यकीं,
हमारे दिल मे वही हैं, सिर्फ वही हैं।
प्यार का अपने जिक्र कैसे करूँ,
वे अक्सर हैं हमसे रूठ जाते।

हमारी कई बाते उन्हें पहुचातीं हैं ठेस,
हर बात का मतलब वे अलग ही निकलते।
सिर्फ हमें है पता , कितना है उन्हें चाहते,
क्यों नहीं वे हमारी चाहत को अंदाज़ पाते।

वे करते हैं हमसे बे-इन्तिहाँ मोहब्बत,
दिल के एक कोने में शक को भी हैं रखते।
करते हैं इंतजार हर घडी हर दम,
मिलने पर छा जाती है ख़ामोशी होठो पर।


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