स्वप्निल के हाइकू

(१)
रात की गोद
टिमटिमाता चाँद
छाया आमोद

(२)
सोई-सी रात
निज साजन साथ
जागा प्रभात

(३)
जगते तारे
नभ की रखवाली
करते सारे

(४)
अन्तस रंग
मौन निर्लिप्त है
आत्म दीप्त है

(५)
क्षण की खोज
सत चित आनन्द
कोश में बंद

(६)
छोड़ हताशा
मनुपुत्र! जीवट
अक्षयवट

(७)
अर्द्ध रात्रि में
घबराया चन्द्रमा
पृथ्वी पे अमा

जीवन की अनिश्चितता पर छः हाइकू

(१)
आया स्टेशन
उतरो अरे भाई!
खत्म जीवन

(२)
रे! सावधान
उन्नति अवसान
यही विधान

(३)
हतप्रभ तू
गीली नयन कोर
झूठी है डोर

(४)
चला गया तू
असमय विलीन
छला गया तू

(५)
अनिश्चित है
अनियत जीवन
सूखा सावन

(६)
झूठे हैं नाते
यहीं तो मिले सब
सदा हैं कब


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