ताउम्र साथ नहीं छोड़ेगा

प्रियजन की नाराजगी, अनबन हमारे मन को दुख और ठेस पहुंचाती है। हम उसे और उन लम्हों को भूल भी नहीं पाते हैं। कलमकार भवदीप सैनी इन हालातों पर लिखते हैं कि सारी उम्र हम उनके साथ इसी तरह जुड़े रहेंगे।

वो मुझे तन्हा करके छोड़ेगा
गलती चाहे उसकी हो या मेरी हो
वो मुझे मुलजिम बना कर छोड़ेगा ।।

उसका यूं बिना बात के गुस्सा होना
देखना मुझे बीमार करके छोड़ेगा ।।

वो अपनी ज़िद्द के लिये अड़ रही है
उसका अड़ना मुझे शमसान करके छोड़ेगा
देखना वो छत को भी दीवार करके छोड़ेगा ।।

वक्त तो सब निकालते है किसी न किसी बहाने से
देखना वो मुझे इतवार करके छोड़ेगा ।।

मेरा इतना यूं नरम दिल होना
मुझे अखबार करके छोड़ेगा
देखना वो मुझे जला कर छोड़ेगा

यूं तो नहीं, थक गयी वो “मुझसे”
और मुझे आधे रास्ते में छोड़ेगा ।।

अच्छा बुरा जो कुछ भी हो जाये
मैं ताउम्र उसका साथ नहीं छोड़ेगा ।।

~ भवदीप सैनी

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