रिश्ता चाहे जैसा हो थोड़ा सा प्यार उसे निखार देता है। यह प्रेम मित्र, बहन, पत्नी व पारिवारिक सदस्य किसी से भी होता है। कलमकार विजय कनौजिया जी लिखते हैं कि हम सब को बस थोड़ा सा प्यार जताने और निभाने की आवश्यकता है।
नहीं रहूँ मैं कल को तो
तुम याद जरा सा कर लेना
रोने से पहले तुम देखो
थोड़ा सा मुस्का देना ..।।चलो साथ थोड़ा ही था
पर दोनों ने अपनाया था
खूब शिकायत कर लेना
पर थोड़ा मान बढ़ा देना ..।।मिलकर दूर चले जाना भी
रिश्तों की मजबूरी है
रहें सवाल तुम्हारे कितने
पर मेरा उत्तर दे देना ..।।चलो बिछड़ना होता ही है
मुलाकात जब होती है
रिश्ते सारे तोड़ भले लो
पर थोड़ा इसे निभा देना ..।।नफरत भी तो प्रेम उपज है
इसको भी मैं सह लूंगा
लाख ठोकरें खा लूंगा
बस थोड़ा प्यार जता देना ..।।~ विजय कनौजिया
हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।
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