लिखते रहो- ज़िन्दगी की सच्चाई

जीवन में अनेकों प्रसंग घटित होते हैं जिनमें से कुछ याद रहता है और कई भूला दिए जाते हैं। कलमकार भवदीप कहते हैं कि हमें हर सुनहरे पल की यादें लिखनी चाहिए।

खुद को लिखते रहो, खुद के सपने को लिखते रहो
अनुमानन गहरी नींद में देखे हुए सपने
सुबह होते-होते धुंधले हो जाते है
इसलिये खुद को लिखते रहो
खुद के सपने को लिखते रहो
सपने धुंधला सकते है लेकिन लिखा हुआ
हमेशा तरो ताजा ही रहेगा
खुद के लिखे हुए को पढ़ते रहो और
लगे रहो उन लिखे हुए सपनो को पूरा करने में
यही ज़िन्दगी है और यही ज़िन्दगी की सच्चाई है।

 

~ भवदीप सैनी

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।https://www.facebook.com/hindibolindia/posts/435546004019244
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