धरती माता

कलमकार सुनील कुमार धरती माता को अपनी यह कविता समर्पित करते हैं। हम सभी उनकी ही संतानें हैं और माता आदर व सम्मान हमारा कर्तव्य है।

धरती है हम सब की माता
हम इसकी संतान हैं
धरती से है अन्न-जल-जीवन
धरती से ही सकल जहान है।
कहीं नदी कहीं है झरना
कहीं पर्वत-वृक्ष विशाल हैं
धरती है हम सब की माता
हम इसकी संतान हैं।
पले-बढ़े हम इस धरती पर
इस धरती पर हमको नाज़ है
धरती है हम सब की माता
हम इसकी संतान हैं।
धरती अपनी करुणा का सागर
ममता की भंडार है
धरती अपनी स्वर्ग से सुंदर
महिमा इसकी अपरंपार है
धरती है हम सब की माता
हम इसकी संतान हैं।

~ सुनील कुमार


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