आयुष्मान की काव्य पंक्तियाँ

अज्ञात से सवाल का
अज्ञात सा जवाब है
अज्ञात सी मेरी नींद में
अज्ञात सा इक ख़्वाब है
अज्ञात से महासागर में
अज्ञात सा ही आब है
मेरी हैसियत कुछ भी नहीं
कोई अज्ञात ही लाजवाब है।

~ आयुष्मान खुराना
साभार: Twitter/@ayushmannk – Shared on September 17, 2019

कभी मेरी अदा पे हुई तवज्जह,
कभी लगी उसे मेरे जिस्म की लत…
और जब हुई तो हुई उसे मेरे बचपने से मोहब्बत!

~ आयुष्मान खुराना
साभार: Twitter/@ayushmannk – Shared on July 30, 2019

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