कोई जब हमारे हित की बात कहता है तो हमें प्रतीत होता है कि यह बकवास कर रहा है। परंतु वे कथन उपदेश ही होते हैं जो आपके जीवन को सरल और सुखद बनाने में बड़ी भूमिका रखते हैं। कलमकार कन्हैया लाल गुप्त जी की इस कविता में पढें कि किस प्रकार उपदेशों ने लोगों में परिवर्तन लाया।

उपदेश साधारण बात नहीं होती है।
गुरु द्वारा ज्ञान की प्रवाह होती है।
कुरूक्षेत्र में कृष्ण ने भी दिया था।
जब अर्जुन दिग्भ्रमित हो रहा था।
तब देनी पड़ी भगवान को उपदेश।
संसार को सन्मार्ग पर लाने हेतु।
मानवता के संत्रास मिटाने हेतु।
सत्य के परख के लिए, धर्म हेतु।
गुरु वशिष्ठ देते राम को उपदेश।
संदीपनी ने कृष्ण सुदामा को दिया।
गुरु शुक्राचार्य ने असुरों को दिया।
आज संसार को पुनः कृष्ण चाहिए।
घोर महाभारत समाप्ति के लिए।
मानवता का संत्रास मिटाने हेतु।
आज भी उपदेश की जरूरत है।

~ डॉ. कन्हैया लाल गुप्त ‘शिक्षक’

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