अहिंसा के पुजारी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बापू के स्मरण में कुछ पंक्तियाँ सूबेदार रावत गर्ग उण्डू ‘राज’ ने लिखी है। बापू के जीवन से हम सभी को अनेक प्रकार की अच्छी सीख मिलती है, जिसे अपनाने में विलंब नहीं करना चाहिए।

भारत देश के नौजवान थे दुश्मन पर भारी तेज आंधी।
हमारे प्रेरणादायी अहिंसा के पुजारी महात्मा जी गांधी।।

देवभूमि भारत के उद्धार हेतु गांधी का अवतार हुआ।
भारत जननी स्वर्ण भूमि में तब नया रक्त संचार हुआ।।

उन्होंने सत्य अहिंसा निर्भयता की, बचपन में शिक्षा पाई।
मानव सेवा सर्वशेष्ठ धर्म अपना, माता ने यही सिखाई।।

इंग्लैंड गये शिक्षा लेने, आज़ाद मुल्क की हवा मिली।
आज़ादी है अनमोल रत्न, जौहरी हृदय को भनक लगी।।

भाषण लिखने पढ़ने की, गोरे केवल अधिकारी थे।
पेशा चुनने धन रखने की, केवल वे ही अधिकारी थे।।

काले हिन्दुस्तानी कुत्ते, दोनों ही एक बराबर थे।
होटल गिरजा में जाने से, भारतवासी वर्जित थे।।

गोरे काले का भेद देखकर, गाँधी का दिल भर आया।
आज़ादी है एकमात्र लक्ष्य, दिल में यह बात उभर आया।।

अंग्रेज़ो भारत छोड़ो आंदोलन नमक सत्याग्रह चलाया।
सब वीर मिल कर स्वतंत्रता के लिए मिलकर हाथ बढ़ाया।।

मिली बड़े हमे गर्व से आजादी बिना खड़ग और ढाल से।
रावत! हमें आजादी मिली अंहिसा के पुजारी की चाल से।।

~ सूबेदार रावत गर्ग उण्डू ‘राज’

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