गणतंत्र

कलमकार पंकज भूषण पाठक “प्रियम” ने भी गणतंत्र दिवस की शुभकामना के साथ यह कविता साझा की है।

आया दिवस गणतंत्र है
अपना देश स्वतंत्र है।
फिर तिरंगा लहराएगा
राग विकास दोहराएगा
देश अपना स्वतंत्र है
आया दिवस गणतंत्र है।

पहन के टोपी आएगा
सेल्फ़ी खूब बनाएगा
नेता चेहरा चमकाता
लूटता देश का तंत्र है
आया दिवस गणतंत्र है।

चरम पे पहुची मंहगाई
घर-घर मायूसी है छाई
नौ का नब्बे कर लेना
बना बाजार लूटतंत्र है
आया दिवस गणतंत्र है।

बेरोजगारी भुखमरी
मरने की है लाचारी
आर्थिक गुलामी के
जंजीरो में जकड़ा
यह कैसा परतन्त्र है
आया दिवस गणतंत्र है।

सरहद पे मरते वीरों का
रोज होता अपमान यहाँ
अफजल याकूब कसाब
को मिलता सम्मान यहां
सेक्युलरिज्म वोटतंत्र है
आया दिवस गणतंत्र है।

सेवक कर रहा है शासन
बैठा वो सोने के आसन
टूजी आदर्श कोलगेट
चारा खाकर लूटा राशन
लालफीताशाही नोटतंत्र है
आया दिवस गणतंत्र है।

भगत -राजगुरु- सुभाष-गांधी
चला आज़ादी की फिर आँधी
समय की फिर यही पुकार है
जंगे आज़ादी फिर स्वीकार है
आ मिल कसम फिर खाते हैं
देश का अभिमान जगाते हैं।
शान से कहेंगे देश स्वतंत्र है
देखो आया दिवस गणतंत्र है।

~ पंकज भूषण पाठक “प्रियम”

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।
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