रस्म जमाने की

इस दुनिया में हम लोगों ने तरह तरह की रस्में बनाकर रखीं हैं, जो लोगों कष्ट भी देतीं हैं। ढोंग और  प्रताड़ित करनेवाली इन रस्मों को त्याग देना चाहिए जो मानवता की राह में एक बड़ा कदम हो सकता है। इन रस्मों से जुड़ी कुछ पंक्तियाँ आप भी पढ़ें जिन्हें कलमकार अमित ने हम सभी से साझा की है।

ए कैसी रस्म-रिवाज है जमाने की
सजा मिलती है यहाँ दिल लगाने की।

जलते है लोग यहाँ दूसरों की खुशी से
चुकानी पड़ती है कर्ज यहाँ मुस्कुराने की।

मोहब्बत में भी कुछ लोग शक करते हैं
प्यार कोई चीज़ नहीं है आजमाने की।

सच्चे आशिक मोहब्बत को पढ़ लेते हैं
जरूरत नहीं होती है प्यार को जताने की।

झूठे दिल से करते हैं लोग पूजा आरती
सच्चे दिल को जरूरत नहीं मंदिर जाने की।

करते हैं मतलब से यारी इस दुनियाँ में
दोस्ती तो होती है बिन स्वार्थ निभाने की।

सिर्फ ज्ञान के भाषण से कुछ नहीं होगा
जरूरत है किसी गिरते हुए को उठाने की।

~ अमित मिश्र

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।
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