बहन- अंशुल का हँसता चेहरा

भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही प्यारा होता है, जिसमें नादानियां, नटखट शरारतें और ढेर सारा प्रेम शामिल होता है। ऐसे में यदि बहन हमसे दूर चली जाए तो उसकी कमी से होनेवाला दर्द कभी मिट नहीं पाता। कलमकार खेम चन्द भी अपनी बहन अंशुल की याद में अपने मन की पीड़ा इन पंक्तियों में लिख दी है।

नादान थी नटखट थी
मेरी शरारतों पर मुस्कुराने वाली मेरी बहना थी
मेरे घर परिवार मेरे सपनों का गहना थी
जब भी मिलती लड़ती मुझसे
रूठती और फिर मुझे मनाती
मेरी बहन अंशुल की नादानियां प्यारी
बस यादों में याद रहेगी बहन बातें तेरी सारी।

खुद की बहन से भी बढकर प्यार दिया तुझे
बनाऊँगा आॅफिसर ये वादा था कहीं किया हुआ मैंने तुझे
खलेगी कमी हर दिन हर वार
सूना हो गया बहना तेरे जाने से घर संसार।

जब भी मिलती, तेरा मुस्कुराना याद है हर लफ्जों के साथ
आज छोडे क्यों बहना पकडे थे तुने जो मेरे हाथ
छोटी थी तो रोज स्कुल समय पर मिलती
तेरी मुस्कान की रौनक संग मेरे चेहरे पर थी खिलती
माता-पिता का था प्रेम दुलार,
दादी माँ का था तुझ पर स्नेह अपार
कहाँ चलेगी हमें छोड़कर हमारी बहना
ये जग ये शिल्ल गांओं और संसार सुना हो गया
खिलखिलाता था तेरी हंसी पर जो परिवार

भूलूंगा नहीं वो आखिरी मुलाकात
जब हंसी खिलखिलाती और बातें की थी हमने मिलकर चार
मेरे लिये नादान थी पर भाई चतुर सा था मुझसे तेरा प्यार
वक्त और समय को कौन बहना हरा पाया है
जब जग छुटा तो सूना वो रजिस्टर सजाया है
तेरी कमी तेरा खालीपन जीवन में भरा नहीं पाऊंगा
पर वादा रहा बहना तेरे स्वप्नों को पूरा मैं कराऊंगा
तू जहाँ भी रहे इस जग में बहना
तेरे नाम का दीपक हमेशा जलाऊंगा।

मुस्कुराती आँखों को पलभर में रूला दिया
बहन अंशुल ने हम सबको ठगा दिया
दूंगी साथ कहा था भाई अध्ययन में तुम्हारा
फिर क्यों बिना सोचे-समझे
मन्त्री भाई से कर लिया बहन किनारा।

~ खेम चन्द

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