जहां केवल अपने ही
अपनों का प्यार होता है
एक छोटे से ही घर में
खुद का पूरा संसार होता है
हां वह परिवार होता है ।
जहां सुबह से लेकर शाम तक
केवल खुशियों के लिए प्रयास होता है
चाहे जितनी भी मुश्किल हो
सभी का हमेशा साथ होता है
हां वह परिवार होता है ।
जहां ‘मैं’ से बड़ा ‘हम’ होता है
सभी के हितों के लिए हर कदम होता है
न कोई छोटा ना कोई बड़ा होता है
ना कोई कपट ना कोई विकार होता है
हां वह परिवार होता है ।
जहां सभ्यता को अलंकृत करने वाला
अभी का अपना संस्कार होता है
सारे गम उसको भुला देने वाला
केवल खुशियों का आधार होता है
हां वह परिवार होता है ।
~ शिवम तिवारी
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