लोगों के न जाने कितने शौक होते हैं, लेकिन क्या उनसे समाज कल्याण भी होता है? कलमकार डॉ कन्हैयालाल गुप्त ‘शिक्षक’ कुछ ऐसे शौक भी पालने को कहते हैं जिनसे किसी का भला हो जाए। आइए वह सब इस कविता में पढते हैं।

शौक समाज सेवा का भी रखिये हुज़ूर।
समाज की पीड़ा कुछ कम होगी हुज़ूर।
शौक बागवानी का भी कुछ रखिये हुज़ूर।
धरती की छाती के घाव कम होगे हुज़ूर।
शौक मित्रों से भी मिलने का हो हुज़ूर।
दृष्टि को नवीनता देखने को मिलेगी हुज़ूर।
शौक पुस्तकों के पढ़ने का भी हो हुज़ूर।
ज्ञान अनुभव में भी इजाफा होगा हुज़ूर।
शौक शेरों शायरी का भी रखिये हुज़ूर।
दिलों के दर्द कुछ कम हो जाएगें हुज़ूर।
शौक प्रकृति निरिक्षण का भी हो हुज़ूर।
दिलों में प्रसन्नता दुगुनी हो जाएगी हुज़ूर।

~ डॉ. कन्हैया लाल गुप्त “शिक्षक”

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