आजकल स्त्री-पुरुष में समानता का भाव दर्शाया जाता है और यह जो आवश्यक भी है। परंतु पुरूष-प्रधान समाज में क्या हर इंसान इस मत से सहमत है? खेम चन्द द्वारा लिखी हुई यह कविता नारियों के प्रति आदर, सम्मान और समानता का माहौल बनाने के लिए प्रेरित करती है।

नवाजी जा रही है आज पर्दे के आगे नारियाँ महान
पर कहीं न कहीं आज भी विश्व के किसी कोने पर है जन्मदात्री परेशान।
बहुत कच्चे दिखते हैं रंग रोगन किये हुये शहर के मुझे हर मकान
पर महिलाओं कि समस्याओं को जाने
अभी भी इतना विकसित नहीं हुआ है
आज का शिक्षित ये जो लगता अशिक्षित मुझे इंसान।
ओढे हुये हैं यहां पर सभी बहुरूपिये स्वच्छ लिबास
गिरी है सोच हम सबकी शायद और
लगाए बैठे हैं सामाजिक परिवर्तन की क्यास।
मत होना तुम लक्ष्मी, सरस्वती, गौरा, काली रूपी नारी हताश
हर पतझड़ हर आंधी -तुफान के बाद भी आते हैं पलास।
कहीं पूजा तो कहीं पर है दुत्कारी जाती
यही समाज यही मानवता पर है विचारों में मारी जाती।
बहुत अतुलनीय तुम्हारा जगत भर में सहयोग
मत करो मानवता के लिबासों पर नारियों को प्रयोग।
मलाला युसुफजई, नादिया मुराद, सुनिता विलियम्स,
पी़ वी सिंधु, सायना नेहवाल है इस युग की नारियाँ विश्व महान
हर गली हर कस्बे कि बेटियों की है ये नारियाँ पहचान।
मत करो ये एकदिन के जलसा-ए-हाजिराना का ढोंग
गर सची विचार श्रृंखला है नारियों के लिये गहना।
तो फिर आज भी क्यों इनको इक्कीसवीं शताब्दी में है पड़ता घरेलू हिंसा को सहना।
मिलकर साथ चले हैं तो मकान पक्का माँ, बहनों, पत्नियों के लिए बनायेंगे
विश्व भर में नारियाँ हो सुरक्षित हम हर गली हर चौराहा हर कोना हर घर सजायेंगे।
गगन छुआ, पाताल को हिलाया है,
पर्वत शिखर सर्वोच्च मांउट ऐवरेस्ट पर भी परचम फहराया है।
अंतरिक्ष में तो सुनिता विलियम्स ने स्पेस वाॅक का नया कीर्तिमान बनाया है।
हो हर रोज नारियों की पूजा हर घर हर विचार
एक दिन की याद के बाद न दिखे कोई नारी लाचार।
आओ बदलें मिलकर हम सभी अपना घर संसार
करो नारियों से सभी प्रेम आपार क्योंकि
नारियों से ही है घर, आंगन, गली में बहार।

~ खेम चन्द

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