शादी की इक़तला

शादी एक नए रिश्ते की शुरुआत होती है और कलमकार ने जताया है कि यदि सहमति हो जाए तो अपार खुशी मिलती है।

तुम अपनी यादों को थोड़ा तो समझा दो
अपनी बातों को थोड़ा तो लज्जा दो
तुम अपनी आँखों को थोड़ा झील करो
मुझे भी थोड़ा नमकीन करो

पूरी दुनियां के सच को सच करो
मम्मी को मना कर
शादी के लिए यस करो
मेरे ख्वाबों को सच करो

मेरे शादी के ख्वाब मर जाये
बस उससे पहले तुम यस करो
मुझे यूँ न तुम हलाल करो
कुछ तो इंसानियत का लिहाज करो

अगर तुम चाहो तो कुछ भी हो सकता है
ना चाहो तो कुछ भी नहीं हो सकता है

ज़िन्दगी बहुत तेज चलती है
सुबह होते ही दस बजती है
तुम खुशहाल रहोगी मेरे साथ
वैसे सब की अपनी-अपनी मर्जी है

समय रहते इक़तला कर देना
यूँ नहीं समय इंतकाल कर दे मेरा

 

~ भवदीप सैनी


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