कहां खो गया खुशियों का संसार

कहां खो गया यह खुशियों का संसार
नहीं कोई सुनता है उस दिल की पुकार
जिन्होंने जोड़े तेरे दर पे दोनों हाथ
माथा भी टेके तेरे द्वार
तेरे ऊपर किया पूर्ण विश्वास
दिया तुझे ऊंचा सम्मान
कहां खो गया यह खुशियों का संसार
मानव निर्मित पत्थर की मूरत को
माना है अपना भगवान
फिर भी कष्ट क्यों भगवान
उनका जीवन हर परिस्थिति में
तेरे नाम का किया जय-जयकार
लगाई तेरे दर्शन को लम्बी कतार
कहां खो गया यह खुशियों का संसार
उनका जीवन जिसने ह्रदय से
नाम जपा तेरा बारंबार
फिर कष्ट क्यों भगवान
माना कर्म लेख विधाता है तू
है ये समस्त तेरा संसार
जिन्होंने माना सिर्फ तुझे भगवान
फिर भी कष्ट क्यों भगवान
कहां खो गया यह खुशियों का संसार

~ प्रिया कसौधन


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