उदास क्यों बैठे हो

उदासी सिर्फ पल दो पल के लिए ही होनी चाहिए। मायूशी में डूब जाना, अन्य सब कुछ भूल जाना – अच्छे संकेत नहीं हैं। कलमकार अमित मिश्र लिखते हैं कि दिल से तेरे भी निकलेगा खंजर, तेरा भी एक दिन बदलेगा मंजर।

तुम उदास क्यों बैठे हो ऐसे
तेरे चमन में भी खिलेंगे फूल।
मन प्रफुल्लित होगा तुम्हारा
तुम भी गम को जाओगे भूल।

तू क्यों बहाता है अश्क अपना
तुझे भी मिलेगी खुशियाँ जरूर।
एक दिन तेरे भी होंगे पूरे सपनें
तेरे भी किस्मत में आएगा नूर।

तेरे भी दिन लौटेंगे खुशियों के
तुझे भी अपनी मंजिल मिलेगी।
है पतझड़ कुछ दिन के लिए ये
फिर तो ताजी कलियाँ खिलेंगी।

दिल से तेरे भी निकलेगा खंजर
तेरा भी एक दिन बदलेगा मंजर।
अभी जो दिल में बहती है सरिता
कभी तो उसमें भी होगा समंदर।

~ अमित मिश्र

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है। https://www.facebook.com/hindibolindia/posts/394284528145392

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