सृष्टि के रचयिता से प्रेम करने से भला कोई कैसे चूक सकता है। वो है ही इतना खूबसूरत जिसकी झलक हर किसी में देखी जा सकती है। “हाँ मैं प्रेम में हूँ” – रागिनी स्वर्णकार की पंक्तियाँ उस अनंत के प्रति प्रेम को जता रही हैं।
अनन्त रमणीय की
सुंदर कृति हूँ ..!कोमल और खूबसूरत
एहसास समेटे हूँ,
देह के रेशे-रेशे में,
इसलिए मैं बेहद
सुंदर हूँ ..!मैं प्रेम में हूँ,
उस अनन्त के ..!हाँ मैं प्रेम में हूँ ..!
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