तरुणाई अब जाग उठी

राष्ट्रीय युवा दिवस पर एकजुट होकर आगे बढ़ने की बात कलमकार लाल देवेंद्र करते हैं। भविष्य की बागडोर हमें ही संभालनी है, अतः सुनहरे आज में सभी युवाओं को सजग होना चाहिए। इस कविता में आप युवाओं का मनोबल बढ़ाने वाले भाव पढ़ेंगे।

तरुणों के मिलने से बनेगा अब तो,
एक नया अनूठा अप्रितम संसार।
तिमिर मिटेगा, होगा नया उजाला,
प्रगति का होगा अब नव संचार।।

नफ़रत का न होगा कोई भी द्वार,
नई क्रांति से तरुणाई भरेगी हुंकार।
मानवता होगी जिसमें परिलक्षित,
प्राचीन रूढ़ियां अब होंगी बेजार।।

हर चेहरे पर नई चमक  निखरेगी,
नई करवट अब नव निर्माण करेगी।
मिटाकर आडंबर, नई सिलवट हो,
शोषण अन्नाय की न नीव बनेगी।।

तरुणाई का ही अब नव युग होगा,
युवा के कंधों पर नया विहान होगा।
जग में नई जोश अब नव परिवर्तन,
ऐसा नवयुग का ताना बाना होगा।।

प्रीत के नवगीतों का संगीत बजेगा,
तरूणों की  बात हर  कोई  सुनेगा।
युवावर्ग को मिले पूर्वजों का आशीष,
अब विषता का न ही स्थान बचेगा।।

नव सृजन का होगा साहित्य सृजन,
स्नेह व प्रीत का होगा अब सत्कार।
नव चेतन की वीणा झंकृत ही होगी,
तरुणाई की अब बहेगी नई बयार।।

~ लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

हिन्दी बोल इंडिया के फेसबुक पेज़ पर भी कलमकार की इस प्रस्तुति को पोस्ट किया गया है।
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