Tag: अनमोल दोहे
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कालजयी अनमोल दोहे (18)
भारत के संतों द्वारा रचित कुछ दोहा काव्य जिनके अर्थ सभी को भली भाँति पता हैं। इन अनमोल दोहों में जो ज्ञान/शिक्षा की बातें बड़ी सरलता से बताईं गईं वह अतुलनीय है। करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान॥ ~ वृंददास प्रेम प्रेम सब कोऊ कहत, प्रेम न जानत…
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लोकप्रिय कवियों के २५ अनमोल दोहे
बिन स्वारथ कैसे सहे, कोऊ करुवे बैन।लात खाय पुचकारिये, होय दुधारू धैन॥ ~ वृंद१ » बिना स्वार्थ के कोई भी व्यक्ति कड़वे वचन नहीं सहता। कड़वा वचन सभी को अप्रिय होता है लेकिन स्वार्थी लोग उसे भी चुपचाप सुन लेते हैं, जैसे गाय के लात/पैर की मार खाने के बाद भी इंसान उसे दूलारता और…