Tag: कलमकार- अतुल कृष्ण
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समय है अपनी चेतना जगाने का
प्रकृति का बलात्कार तो आदम ने बहुत किया हर शतक हमने अनदेखा तो कर दिया विकराल काल के संकेत को कलियुग का है यह अदृश्य असुर सुन सके तो ठीक से सुन इसके तांडव का हर एक सुर एक ताल को एक शतक के अंतराल फिर खड़ा है ये विकराल “काल” करोना प्रकृति का और…
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हर ओर एक अजब सन्नाटा है
भोर से साँझ तक औरसाँझ से रात तक भोर तकहर पल अब यूँ है लगताजिंदगी ही एक रहस्य हो जैसेपेड़ों पे गौरैइया, दिन में भी चुप हैंलगता है एकदम बौउरा गये हैंऔर ये गली के कुत्तेरात के सन्नाटे में भी सब चुप हैं अजब खामोशी हैघर के भीतर अपनों केसिर्फ दिल की धड़कनऔर पड़ोसियों के…