Tag: कलमकार- धीरज गुप्ता
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अब ना आयेगा
लाकडाउन मे जो लोग विभ्भिन परिस्थितियो में मारे गये लोगों को यह कविता समर्पित। ईश्वर उनकि आत्मा को शांति प्रदान करे। अन्धेरा छट जायेगा, सूरज जब उग आयेगा! दिपक भी जल जायेगा, उस मॉ को कौन समझायेगा? जिसका लाल अब ना आयेगा। घर कि खुशिया लूट जायेगा, अब कहा घर मे रौनक आयेगा! विरान पड़…
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आत्म निर्भर बनना है
अब करना है, आत्म निर्भर बनने का प्रयास।। मत बैठो उन के भरोसे, जो करते है आप का उपहास।। अब करना है, आत्म निर्भर बनने का प्रयास।। दुख सुख के साथी बनो, अपनो को ले कर साथ।। जीना है खुद के भरोसे, अब दुसरो से कैसी आस।। अब करना है, आत्म निर्भर बनने का प्रयास।।…
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हर गुण सिखायेगी माँ
माँ है वोतुम्हे हर गुण सिखायेगीआगे चल कर तुम्हे तम्हारी माँ ही याद आयेगीसीख लोगी गर माँ से तुम दुनीया तुम्हे कभी ना डरा पायेगीनही सूनोगी ताने तुमससुराल मे भी मुस्कुराओगी माँ है वोतुम्हे हर गुण सिखायेगीलोक लाज कि बाते भी मॉ ही तुम्हे बतायेगीबच्चो का पालन करना वो भी तुम्हे सिखायेगीमाँ है वोतुमको भी…
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सपनो का संसार
खुले गॉव को छोड करआया था शहर, करने व्यापारतंग गलियो मे सिमट गया, सपनो का संसार काम-धन्धा सब चौपट हुआछुट गया घर बार जब से फैला है महामारी का प्रसार रातो मे अब नीद ना आती गॉव कि चिन्ता मूझे सताती कैसे होगें मॉ बाप अब आस लगा रखी है सरकार से मदद मिल जाये…
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दो गज की दूरी
बात है जरूरी बताना भी है जरूरीबना लो दो गज की दूरीरिस्ते है जरूरी मत बढाओ मन कि दूरी बना लो दो गज की दूरीडकोई बात हो मजबूरीनही जाना है जरूरीये जहान भी जरूरी ये जान भी जरूरी बना लो दो गज की दूरीअफवाहो को मत फैलाओ तुमबिना वजह बाहर मत जाओ तुमसमाजिक दूरी भी…