Tag: कलमकार- नीकेश यादव

  • सुरा के सूर

    सुरा के सूर

    जब से लॉक डाउन हो गया मेरा मन बेचैन हो गया। होगा कैसे व्यतीत ये क्षण कैसे कटेगे मेरे ये दिन।। सुरागार जब बंद हो गए जीवन कैसे चल पाएगा। किन्तु धीमे धीमे मंद गति से लॉक डाउन कट जाएगा।। लॉक डाउन की आदत पड़ गई मदिरा की बेचैनी छूट गई । तभी सरकार ने…

  • अहंकार का नशा

    अहंकार का नशा

    अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है। हम सभी को ईश्वर से कामना करनी चाहिए कि वह हमें अहंकार से मुक्त रखें। कलमकार नीकेश सिंह ने अहंकार जैसे विषय पर अपने विचार इस कविता में प्रस्तुत किए हैं।   मै चार पैसे क्या कमाने लगा? मुझ पर अहंकार छाने लगा।। अहंकार का अस्तित्व बढ़ता…

  • मजदूर बना मजबूर

    मजदूर बना मजबूर

    मजदूर बना मजबूर हां मजदूर हूं मै। बेबस और मजबूर हूं मै।। काम देखकर स्वप्न दिखाकर मुझको तुमने अपना लिया। आती देख मुसीबत मुझ पर तुमने मुझको ठुकरा दिया।। लाचार और विवश होकर के मैंने अपना घर छोड़ा। मुसीबत में मै तेरे जीवन का बन गया एक रोड़ा।। हाथ पकड़ मुझे उठा ऐसे ना साथ…