Tag: कलमकार- पूजा खत्री
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उफ़! जज्बात कहां से लाऊं?
कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाते हैं, उन्हें भावनाओं के माध्यम से ही समझना पड़ता है। कलमकार पूजा खत्री की चंद पंक्तियाँ पढें जो इसी मुद्दे को संबोधित कर रहीं हैं। उफ़ दर्द न हो सीने मे ऐसे जज्बात कहां से लाऊं टूटे दिल ओर हंसते चेहरे वो हंसी वी खयाल कहां से लाऊं…