Tag: कलमकार- प्रिया कसौधन

  • कहां खो गया खुशियों का संसार

    कहां खो गया खुशियों का संसार

    कहां खो गया यह खुशियों का संसार नहीं कोई सुनता है उस दिल की पुकार जिन्होंने जोड़े तेरे दर पे दोनों हाथ माथा भी टेके तेरे द्वार तेरे ऊपर किया पूर्ण विश्वास दिया तुझे ऊंचा सम्मान कहां खो गया यह खुशियों का संसार मानव निर्मित पत्थर की मूरत को माना है अपना भगवान फिर भी…

  • सब्र

    सब्र

    आपने सुना होगा कि सब्र का फल मीठा होता है। इसी कहावत पर अमल करते हुए हम बहुत जगह सब्र करते हैं। अनेक स्थानों पर सब्र के शिवा दूसरा चारा ही नहीं है। इसी विषय पर कलमकार प्रिया कसौधन की एक कविता पढ़ें। मैं सब्र करती जा रही हूं। जीवन की आशा से, बढ़ती निराशा…