Tag: कलमकार- बिट्टू भगत
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मां की आंचल
बहुत मन करता है तेरी आंचल में रहने का तेरी लोरी सुनने के लिए बैचन रहती हूं तेरे बिना इस दुनिया में कोई पूछता ही नहीं तेरी हाथो से खाने का मन करता है पर तू कभी आती ही नहीं तूने मुझे जन्म तो दिया पर अपने गोद में खिलाया ही नहीं मां तूने कभी…