Tag: कलमकार- मोहित पाण्डेय

  • श्रमिक

    श्रमिक

    व्यथीथ हो चला था हृदय में अपने अनंत पीड़ा लेकर वह अपने घर को चला था क्या करता इस बड़े से शहर में शहर के व्यवहार से, वह कुपित हो चला था ऐसा नहीं था कि नहीं थे अच्छे लोग, उस शहर में पर वह उनसे अब तक, न मिल सका था शहर की चकाचौंध…

  • सम्भले रहो

    सम्भले रहो

    एक विपदा आई हैसम्भले रहो, सम्भले रहोबैठ कर देखो तमाशा हो रहा है जो, संसार मेंपर करना कुछ भी नहींयदि, करना है तो बस ये करोकेवल अपनी ‘खटिया’ से चिपके रहो, चिपके रहोहो कर चुपचाप देखोटी. वी. पर सबकी बात देखोसमझो और समझाओअऊर भईया! और कोरोना को दूर भगाओ.. – मोहित पाण्डेय