Tag: श्रद्धांजलि
-
श्रद्धांजलि: अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि
“मनुष्य जीवन अनमोल निधि है, पुण्य का प्रसाद है। हम केवल अपने लिए न जिएं, औरों के लिए भी जिएं। जीवन जीना एक कला है, एक विज्ञान है। दोनों का समन्वय आवश्यक है।”~ भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी परम पूजनीय “अटल” जिनका प्रत्येक शब्द था इक अमिट लकीर के जैसा,जिनको प्यारे थे दोनों, साफ़ विचार…
-
राहत इंदौरी को कलमकारों का सलाम
सुप्रसिद्ध शायर और गीतकार राहत इंदौरी अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका मंगलवार ११ अगस्त २०२० को दिल का दौरा पड़ने से इंदौर में निधन हो गया। उनकी शायरी का अंदाज सभी को बहुत भाता था और हिन्दी एवं उर्दू पाठक/श्रोता उन्हें काफी पसंद करते थे। हिन्दी कलमकारों ने भी कुछ पंक्तियाँ लिख उन्हे याद…
-
-
निगल गया वो मजदूरों को
औरेया हादसे में मारे गये सभी मजदूर भाइयों को भावभीनी श्रद्धांजलि बीमारी का संकट था फैला काम का पड़ गया टोटा था, जिंदगी मानो ठहर गई थी घर मे सबको रोका था।जिनके घर थे ठहर गए वो पर उनके लिए वो धोखा था, रोज कमाते रोज थे खाते प्राणों को ऐसे ही रोका था।पेट की…
-
मजदूर की आवाज
चारों ओर से सवालों का बौछार था,अपने ही व्यवस्था से बीमार था,लेकिन रेल की पटरी से उठ खड़ा जवाब तैयार था,मैं मजदूर था साहब!अपने ही घर की छतों से दूर था,बस रोटी के लिए मजबूर था। परिस्थितियों का मारा था,पर स्थितियों से नहीं हारा था,सबको चुनौती देकर घर से निकल पड़ा बंजारा था। बस अपनों…
-
पेट पालने की मजबूरी
औरंगाबाद ट्रेन हादसे में मारे गए सभी मज़दूर भाइयों को भावभीनी श्रद्धांजलि…. गाँव मे नहीं था रोजगार का कोई भी साधन,चला गया था दूर शहर मैं लेकर अपने प्रियजन।दिन भर मजदूरी करता था पैसे चार कमाता था,हर शाम थक हार कर मैं रूखा सूखा ही खाता था।घर पर मेरी पत्नी बूढ़ी माँ का ख्याल रखा…
-
श्रद्धांजलि
रोटी भी ये क्या क्या नहीं करवाती है, कभी सड़क कभी पटरी पर ले जाती है। जीते जी ना मिल सकीं वो सुविधाएं, अब ये मृत देह हवाई जहाज से आती है। एक कटोरी दाल तक न मिल पायी, अब घर सरकार पाँच लाख दे जाती है। श्रमिकों की मजबूरी को ना समझा कोई, चहुँ…
-
मजबूरी मजदूरों की
हाय! कैसी है ये, मजबूरी मजदूरों की। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए चले जाते है,परिवार से दूर ताकी कही मजदूरी कर, पाल सके, परिवारों का पेट। हाय! कैसी है? ये पेट की आग। जो मजदूरों को कर देती,अपनों से दूर। हाय! यही चार रोटी है, जिसके लिए आए थे, घर छोड़…….!! आज यही…
-
अब ना आयेगा
लाकडाउन मे जो लोग विभ्भिन परिस्थितियो में मारे गये लोगों को यह कविता समर्पित। ईश्वर उनकि आत्मा को शांति प्रदान करे। अन्धेरा छट जायेगा, सूरज जब उग आयेगा! दिपक भी जल जायेगा, उस मॉ को कौन समझायेगा? जिसका लाल अब ना आयेगा। घर कि खुशिया लूट जायेगा, अब कहा घर मे रौनक आयेगा! विरान पड़…
-
अमर बलिदानी- वीर जवान
शहीदों के बलिदान को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कलमकार खेम चन्द कहते हैं कि शब्दों में बयाँ नहीं हो पायेगा अमर बलिदानियों का बलिदान; जय हिन्द जय भारत अमर जवान हमारे महान। कहाँ खो गयी हँसती खेलती सुकून दिलाती वो मुस्कान क्या कर बैठा ये मेरे भगवान।।इन्तज़ार में ही छोड़ कर चला गया आज…
-
मजदूरों की रोटियाँ
सोलह मजदूरों को ट्रेन से रौंद दिया जाना और उनका अपने घर ना पहुंच पाना, बहुत दर्दनाक व वीभत्स घटना है। जो भी देखा सुना, जाना, सबके रूह कांप गए। रात भर एक भयावह सपने की तरह सभी को परेशान करता रहा। मजदूर भाइयों की बेबासिया सरकारी अंग से कटकर काल के गाल में चली…
-
रक्तरंजित रोटियाँ
पटरियों पे रक्तरंजित रोटियाँ, रोटियों संग पड़ी थीं बोटियाँ। थक गये क़दम मुसाफ़िरों के, झपकियाँ पटरियों पे सुला गईं। मुफ़लिसी फिर तितर-बितर हुई, घर पहुँचने की आरज़ू कुचल गई। चीत्कार चौखटें कई करने लगीं। दर्द के दामन में वीरानियां सोने लगीं। वो लौट कर फिर ना आयेंगे कभी, ये जानकर दीवारें दर्द से दरकने लगीं।…
-
भारत माँ के सपूत
हंदवाड़ा शहीदी को नमन करती एक कविता। कौन कहता है बेटे विदा नहीं होते है जब तिरंगे में लिपटा उनका देह आया होगा। उन सपूत की माँ का दर्द भला कौन समझ पाया होगा। कोई मोल नहीं लगा सकता उनके प्रेम के क्षमता का, फिर क्यो भूल जाते है सब उनकी ममता का। वो देश…
-
आओ हम फिर दीप जलाये
हंदवाड़ा, जम्मू कश्मीर में पाँच शहीदों की शहादत पर एक कविता। बुझे आग को फिर सुलगायें। जो माता को शीश चढ़ायें। उनपें हम नत मस्तक हो जायें। भारत माँ के सच्चे लाल। देश की जो रक्षा में अपने जीवन का देकर बलिदान। अपने प्राणों की लौ से वह देश की रक्षा में बलिदान। तन देकर…
-
-
सेना के जवान
हंदवाडा के शहीदो को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि। शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा। जयहिंद, जय भारत हाँ वो सेना का जवान है, फक्र है उसपे,अभिमान है। दो माँओं का दर्द ये मुझसे, अब नही देखा जाता। एक धरा ये माँ है उसकी, एक जना जिसने…
-
शाख से पत्ते टूटते रहते हैं
भारत ने दो दिन के अंदर अपनी दो बेहतरीन शख्सियत खो दी हैं। कल इरफ़ान ख़ान जी और आज ॠषि कपूर जी को…. दोनों महान कलाकारों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। शाख से पत्ते टूटते रहते हैं, एक दूसरे से छूटते रहते हैं, दस्तूर धरा का बड़ा निराला है, नए पत्ते आते हैं तो पुराने छूटते रहते…
-
ऋषि कपूर
दिग्गज कलाकार ऋषि कपूर के असमायिक निधन का समाचार आया यह फिल्म जगत और सिने प्रेमियों के लिए अपूर्णीय क्षति है। इस शोकाकुल अवसर पर मैं विनम्र काव्य श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ऋषि कपूर इक कलाकार महान कपूर परिवार की आन बान और शान अपने जानदार अभिनय से रोल मे डालते जान सशक्त अभिनय से…
-
ईरफान खान
ईरफान खान गुणों की खान नेक इंसान अभिनेता महान विश्व मे उनकी थी पहचान हालीवुड मे उनको मिला सम्मान फिल्मों और रंगमंच के सशक्त कलाकार कला पारखी और उत्तम आचार मानवता से भरपूर वयवहार सहयोगी कलाकारों मे बांटा प्यार कला को दिए नए आयाम इस क्षेत्र में कमाया नाम साधारण रंगरूप अभिनय मे असीम योगदान…
-
इरफ़ान सर! क्यों चले गए?
हे पान सिंह तोमर! वर्सेटाइल एक्टर इरफ़ान सर!! तेरे अचानक जाने से स्तब्ध हो गया है जगत अश्रुपूरित हो गया है जगत क्यों चले गए सर आप क्यों छोड़ गए सर आप वालीवुड को व हम सभी साधारण भारतीय को आप तो वश्विक जगत में अभिनय के प्रतिनिधि थे आप तो बेमिसाल थे अभिनय के…