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  • शिक्षकों को नमन

    शिक्षकों को नमन

    शिक्षक-गुरु मेरी प्रथम गुरु मेरी माता हैं,वो बोलना-चलना सिखाती हैं,वो हमें संस्कार सिखाती हैं,तभी तो सौ गुरुओं के बराबर होती हैं,दूसरा गुरु मेरा शाला-शिक्षक हैं,जो जीवन के कठिन डगर परचलने की राह बताता हैं,जो खुद दीपक की तरह जलकर,हमारे जीवन को रोशन कर जाता हैं,कुछ इस तरह,गुरु अपना फर्ज निभा जाता हैं,गुरु ही समाज-देश का…