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  • तालाबंदी के बीते क्षण (संस्मरण) – इमरान संभलशाही

    जब जन समुदायों की दैनंदिन दिनचर्या अचानक से ठप होने लगी। प्राण सिसकने से लगे। वातावरण सारे विस्मय होने लगे। सूरज भी फीका पड़ने लगा। चांद भी अपने बारी आने के इंतजार में सुस्ताने लगी। मौसल बेताल हो गया। पशु पक्षियों सहित सारे जीव जंतु चिंतित हो उठने लगे। आसमान का रंग गहराता चला जाने…