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होली के रंग
रंग ~ डॉ. रमाकांत ‘क्षितिज’ जो भी आंखों से देख पाता हूंवह तुम ही तो होसफेद हो नीले हो हरे हो पीले होजो देखता हूंहर रूप में तुम ही तुम होहम तुम्हारे साथ खेलते हैं यातुम हमारे साथ खेलते हो तुम्हारा एक रूप आंखों से दिखता हैतुम्हारे बहुत से रूप भावों से दिखते हैंजिन्हें देखने…