Tag: नृत्य दिवस

  • वो नाचती थी

    वो नाचती थी

    जीवन की,हकीकत से,अनजान। अपनी लय में,अपनी ताल में,हर बात से अनजान। वो नाचती थीसोचती थी नाचना ही जिंदगी है।गीत-लय-ताल ही बंदगी है।नाचना ही जिंदगी है।नहीं शायदनाचना ही जिंदगी नहीं है। इंसान हालात से नाच सकता है।मजबूरियों की,लंबी कतार पे नाच सकता है। लेकिन अपने लिए,अपनी खुशी से नाचना। जिंदगी में यहीं,संभव-सा नहीं। हकीकतें दिखीपाव थम…