Tag: तालाबंदी

  • बहते आँसू

    बहते आँसू

    कोरोना का रोना रोते इंसानों के आँखों से बहते आँसू कह जाते हालातों को बिन बोले। तपती धूप में प्यासे कंठ लिए पाँवों में छाले लिए घर जाने की आस लिए भूखे प्यासे राहगीर चलते जाते मन से जलते जाते? सेवाभावी लोगों से मिल जाती दो जून की रोटियाँ। फिक्र का बोझ उठाए कर्ज की…

  • हर भूखे को रोटी खिलाने का वक़्त है

    हर भूखे को रोटी खिलाने का वक़्त है

    इंसानियत का रिश्ता निभाने का वक़्त है हर भूखे को रोटी खिलाने का वक़्त है..।। मजबूर जो बेबस हैं कोरोना की मार से हम साथ उनके हैं ये दिखाने का वक़्त है..।। ये दुःख भी बांट लो चलें मिलजुल कर आज हम एक अच्छा इंसान बनने का वक़्त है..।। विजयी बनेंगे आप हम यदि ठान…

  • प्रकृति अब खिल रही है

    प्रकृति अब खिल रही है

    प्रकृति अब खिल रही है कैद करके हमें घरों में वो स्वतंत्र जी रही है कुछ अलग ही रौनक है अब पत्ते-पत्ते में, डाली-डाली में फूल भी खिलखिला रहें है भौंरे भी गा रहें हैं पंछी भी चहचहा रहे हैं मानो वो अपनी जीत का जश्न मना रहे हैं प्रकृति अब खिल रही है कैद…

  • विधाता का खेल

    विधाता का खेल

    कैसा यह खेल है जो विधाता ने रचा है। विधाता का खेल तो देखिए कि आज इंसान घरों में कैद है और प्रकृति, पशु-पक्षी सब आजाद हैं। कहीं यह प्रकृति और विधाता का सम्मिलित खेल तो नहीं है, हम इंसानों को सबक सिखाने का, हमें यह बताने का कि प्रकृति से ऊपर कुछ भी नहीं…

  • तेरी बनाई इस सृष्टि में इंसान

    तेरी बनाई इस सृष्टि में इंसान

    तेरी बनाई इस सृष्टि में भगवान, इंसान अब डरा-डरा सा हैं। कहने को सिर्फ वो जी रहा, लेकिन अंदर से मरा-मरा सा है।। हर जगह सिर्फ मौत की खबरे, सुना पडा ये संसार है। बच गये तो समझो सुन ली भगवान ने, वरना समझना दुआएं तुम्हारी बेकार है।। आज भगवान तुरन्त याद आया, जब खुद…

  • मजदूर की दुर्दशा

    मजदूर की दुर्दशा

    दिखा रहा अपना रौद्र रूप ये महामारी हैं,गरीब मजदूरों की बढ़ती ये लाचारी हैं।लॉक डाउन के दौरान,फैक्ट्री में फंसे थे मजदूर चार।मालिक मौका देख हो गया फरार,छोड़ दिया तड़पते उन्हें बिना अनाज।भूख ने ले ली उसकी जान,देखने न गया कोई द्वार।परिवार से दूर था,रोटी कमाने निकला था।माँ का लाडला था,होटो की मुस्कुराहट था।आह! कराह उठा…

  • मैं मजदूर की बेटी हूँ

    मैं मजदूर की बेटी हूँ

    आओ दोस्तों मजदूरोंकी दास्तां सुनाती हूँ।दूसरों की छोड़ो मैं खुदमजदूर पिता की बेटी हूँ। ज़िन्दगी के हर उतर चढ़ावको मैंने आँखों से देखा है।भूख से अपनी माँ को पेट मेंगमछा बांधते देखा है। एक-एक रूपये कमाने कादर्द मैं अच्छे से जानती हूँ।आज भी 5रूपये बचाने कोमैं रोज पैदल पढ़ने जाती हूँ। चाँदी को पिघलाने मेंसाँस…

  • जिंदगी सड़कों पर

    जिंदगी सड़कों पर

    जिंदगी सड़कों पर,लाचार बैठी है। अपने घर और काम से,बेजार बैठी है। कोरोना क्या मारेगा।इन जिंदगियों को, जो जिंदगीयां,जिंदगी से लड़ने को,तैयार बैठी हैं । जिंदगी सड़कों पर,लाचार बैठी है। घर -काम से,निकाल दिया इनको,गाड़ी -बसों के लिए,अपने घर तक जाने को,लाचार बैठी हैं। सरकारें कहती है।मिलेगा खाना।जिंदगी बदहालीयों में भी,मुस्कुरा कर जिंदगी के साथ…

  • पथिक तुम सुनो

    पथिक तुम सुनो

    ख्वाब में आते हो,चले भी जाते होगरीबी सहते हो, गरीबी खाते हो ऐ निकलने वालों पथिक तुम सुनोबहुत रोने वालो श्रमिक तुम सुनो तेरे पेट में जो, इक दाना नहींकैसे भूख मिटे, कोई खाना नहींतेरा प्यास बुझे, कतरा पानी नहीं तू वापस आए क्यों?नींद में सोए क्यों?ट्रेन से कटकर यूं!मौत बुलाए क्यों? तू अपने गावों…

  • बेबसी

    बेबसी

    भस्म कर दूं स्वयं कोअंगारों को पाल रखूँ सीने में। देश जिनके कर्मों पर खड़ा हैसड़कों पर आज बेबस लाचार रह गया है। मर रहे हैं सड़कों पर इसे कफ़न नसीब कर दोजिंदा ना सही, लाशों को उसके घर वालों से मिलवा दो। बेबस है जिंदगी इसे दौलत नहीं चाहिएइसे एक नजर बच्चों से मिलवा…

  • सब भूल गये

    सब भूल गये

    वो ईफ्तार और शेहरीवो धूप और दुपहरीसब भूल गये मदद को निकल पडे़अम्मी की बनाई रोटीयाआचार और पानीदेख उसे भूखे को होती है परेशानी अल्लाह ने दिया नही ज्यादा उसेकैसे वो करे किसी पर मेहरबानीजो रूखी सूखी मिलीहर भूखे की भूख मिटी मत फैलाओ दुनिया वालोमत करो देश से गद्दारीकुछ लोगो के खातिरपूरे कौम की…

  • हाँ! मैं मजदूर हूँ

    हाँ! मैं मजदूर हूँ

    हाँ! मैं मजदूर हूँकड़ी मेहनत करता हूँपसीना बहाता हूँधूप, वर्षा,शीत से लड़ता हूँ हाँ! मैं मजदूर हूँमजदूरी करना मेरा काम हैमेहनत से रोटी खानामेरा धर्म हैराष्ट्र निर्माण में योगदान देता हूँहाँ! मैं मजदूर हूँ कठिन से कठिन कार्यको सरल बना देता हूँपर्वतों को काटकरमार्ग बना देता हूँकाम को करने मेंपीछे नहीं हटता हूँ, क्योंकिहाँ! मैं…

  • मजदूर की आवाज

    मजदूर की आवाज

    चारों ओर से सवालों का बौछार था,अपने ही व्यवस्था से बीमार था,लेकिन रेल की पटरी से उठ खड़ा जवाब तैयार था,मैं मजदूर था साहब!अपने ही घर की छतों से दूर था,बस रोटी के लिए मजबूर था। परिस्थितियों का मारा था,पर स्थितियों से नहीं हारा था,सबको चुनौती देकर घर से निकल पड़ा बंजारा था। बस अपनों…

  • मजदूर का दर्द

    मजदूर का दर्द

    सोचा नही था कभी ऐसा दिन भी आयेगा,जेल छोड़ घर ही कैदखाना बन जायेगा। मजदूरी करके जब शाम को लौटकर आता थाअपने दोस्तों के साथ चाय पीने जाता थादिनभर के थकान उस पल में भूल जाता थाएक दूसरे के दर्दो का साथी बन जाता था सोचा नही था कभी साथ इस तरह छूट जायेगा,अपने भी…

  • पेट पालने की मजबूरी

    पेट पालने की मजबूरी

    औरंगाबाद ट्रेन हादसे में मारे गए सभी मज़दूर भाइयों को भावभीनी श्रद्धांजलि…. गाँव मे नहीं था रोजगार का कोई भी साधन,चला गया था दूर शहर मैं लेकर अपने प्रियजन।दिन भर मजदूरी करता था पैसे चार कमाता था,हर शाम थक हार कर मैं रूखा सूखा ही खाता था।घर पर मेरी पत्नी बूढ़ी माँ का ख्याल रखा…

  • लम्हा 

    लम्हा 

    ठहर थोड़ा अभी और तूँ सब्र रख चमन होगा गुलजार फिर इत्मिनान रख। नाव भले ही फँस गयी मझधार में जिन्दा रहेगा बस अपना खयाल रख । बेशक कैद सी हो गयी जिन्दगी इश्क का इम्तिहां है खुद पर यकीं रख। शिकारी खड़ा बाहर कदम कदम पर आगोश में जकड़ लेगा दरवाजा बंद रख। जीया…

  • जिंदगी लॉकडाउन

    जिंदगी लॉकडाउन

    इस सुनसान सड़क में एक कोना हैं चादर से लिपटा हैं कुछ घर सा दिखता हैं इस लॉकडाउन में भी पूरा खुला हैं बिना दिवार का वो महल सा लगता हैं कुछ आवाज़े आती हैं कुछ सिसकियाँ उस कोने में हैं कई जिंदगिया एक मासूम दौड़ा दौड़ा फिरता है इतना बेख़ौफ़ उसे पहली बार देखा…

  • खतरे में अर्थव्यवस्था

    खतरे में अर्थव्यवस्था

    एक महामारी के कारण, हुई देश की हालत खस्ता, चीन ने ऎसा वायरस छोड़ा, है खतरे में अर्थव्यवस्था। परेशान है सभी देश अब, हुई सभी की हालत पतली, घरों की रौनक भी खोयी है, बाहर की भी रंगत बदली, सभी घरों में बंद हो गए, कुछ भी रह गया ना सस्ता, चीन ने ऎसा वायरस…

  • मधुशाला की बात निराली

    मधुशाला की बात निराली

    हो संकट या, कोई विकट मधुशाला में, लगा है जमघट विपदा हो, या खुशहाली मधुशाला की बात निराली। लोग कोरोना से है, भय पाता मधुशाला का, दौरा लगाता मंदिर-मस्जिद, सब पर ताले मस्त है, फिर भी पीनेवाले यह देश की है, कैसी नीति? मधुशाला की बात निराली। सामाजिक दूरत्व का, ध्यान भी रखते मास्क लगाकर,…

  • मैं तुम्हारे साथ-साथ

    मैं तुम्हारे साथ-साथ

    कोरोना काल में ईश्वर पर दोषारोपण करने वालों को ईश्वर का जबाब- रूठो नही टूटो नही मैं तुम्हारे साथ-साथ सदा तेरे सर पे हाथ। डरो नहीं, झुको नहीं मिलाओ न अभी हाथ-हाथ मैं तुम्हारे साथ-साथ सदा तेरे सर पे हाथ। आओ नहीं, कहीं जाओ नहीं, दो गज दूरी हर बात-बात मैं तुम्हारे साथ-साथ सदा तेरे…