Tag: तालाबंदी
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घरो में सुरक्षित रहना
कैसा ये वक्त आया कि हम सभी घर में ही रह रहें, सभी अपने अपने घरों में रहो ये हमारे प्रिय मोदी जी कह रहे कहते है जो जहां है वो वही रहे तो अच्छा होगा, जल्दी ही भारत का सुरक्षित हर एक नागरिक होगा, देश वासियों देखो चीन और अमेरिका जूझ रहा है इस…
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कोरोना से जंग
कोरोना वायरस से छिड़ी हुई जंग शत्रु है शक्तिशाली अदृष्य और अनंग पूरी दुनिया को किया है तंग महाशक्तियाँ हुई है अवाक और दंग पूरी दुनिया पर कर रहा है वार इस के आगे सब लाचार सारे उपाय हैं बेकार इस का कोई नहीं उपचार बचाव ही एकमात्र उपाय घरों मे रहें और बाहर न…
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श्रद्धांजलि
रोटी भी ये क्या क्या नहीं करवाती है, कभी सड़क कभी पटरी पर ले जाती है। जीते जी ना मिल सकीं वो सुविधाएं, अब ये मृत देह हवाई जहाज से आती है। एक कटोरी दाल तक न मिल पायी, अब घर सरकार पाँच लाख दे जाती है। श्रमिकों की मजबूरी को ना समझा कोई, चहुँ…
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मजबूरी मजदूरों की
हाय! कैसी है ये, मजबूरी मजदूरों की। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए चले जाते है,परिवार से दूर ताकी कही मजदूरी कर, पाल सके, परिवारों का पेट। हाय! कैसी है? ये पेट की आग। जो मजदूरों को कर देती,अपनों से दूर। हाय! यही चार रोटी है, जिसके लिए आए थे, घर छोड़…….!! आज यही…
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सुरा के सूर
जब से लॉक डाउन हो गया मेरा मन बेचैन हो गया। होगा कैसे व्यतीत ये क्षण कैसे कटेगे मेरे ये दिन।। सुरागार जब बंद हो गए जीवन कैसे चल पाएगा। किन्तु धीमे धीमे मंद गति से लॉक डाउन कट जाएगा।। लॉक डाउन की आदत पड़ गई मदिरा की बेचैनी छूट गई । तभी सरकार ने…
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अब ना आयेगा
लाकडाउन मे जो लोग विभ्भिन परिस्थितियो में मारे गये लोगों को यह कविता समर्पित। ईश्वर उनकि आत्मा को शांति प्रदान करे। अन्धेरा छट जायेगा, सूरज जब उग आयेगा! दिपक भी जल जायेगा, उस मॉ को कौन समझायेगा? जिसका लाल अब ना आयेगा। घर कि खुशिया लूट जायेगा, अब कहा घर मे रौनक आयेगा! विरान पड़…
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तन्हा रहना सीख लिया
इस लाॅकडाउन ने बहुत कुछ हम सभी को सिखा दिया है। तालाबंदी कठिन समय है लेकिन बहुत सहनशक्ति दे चुका है। यह सब हमारी बेहतरी के लिए ही है, कलमकार विजय कनौजिया जी कहते हैं कि इसने तो अकेला रहना भी सिखा दिया। चार दिवारी में रहकर चुप-चुप सा रहना सीख लिया दीवारों से हुई…
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आत्म निर्भर बनना है
अब करना है, आत्म निर्भर बनने का प्रयास।। मत बैठो उन के भरोसे, जो करते है आप का उपहास।। अब करना है, आत्म निर्भर बनने का प्रयास।। दुख सुख के साथी बनो, अपनो को ले कर साथ।। जीना है खुद के भरोसे, अब दुसरो से कैसी आस।। अब करना है, आत्म निर्भर बनने का प्रयास।।…
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प्रकृति का रौद्ररूप
मानव ने की प्रकृति से छेड़छाड़ जंगलों को दिया उजाड़ पेड़ पौधों से की खिलवाड़ खोल दिए विनाश के किबाड़ मात्र स्वार्थ के लिए अपना धर्म भूल गया मानवता को तज कर संस्कार भूल गया ईश्वरीय सत्ता को चुनौती दे डाली परिणाम विनाश महाविनाश प्रकृति ने रौद्ररूप दिखाया पूरा विश्व इस से घबराया हर जगह…
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सहयोग
सबको करना चाहिए, सबका नित सहयोग। अपनी संस्कृति सभ्यता, कभी न भूलें लोग।। मानव गर करता रहे, मानव का सहयोग। भाग खड़े हों आपसी, सामाजिक सब रोग।। प्रेम दया सहयोग है, मानवता का मूल। चकाचौंध में उलझकर, कभी न इनको भूल।। सारा विश्व माँग रहा, आज महा सहयोग। मिलकर करके सामना, दूर करें यह रोग।।…
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वो दौर, ये दौर
नक़ाब शब्द ऐसा है जिसे आप अपनी शब्दावली में सजाकर मोहब्बती क़सीदे पढ़ते है वही दूसरी तरफ़ किसी के चरित्र की धज्जियाँ भीउड़ाते है। नक़ाब उस दौर में मतलब कोरोना त्रासदी से पूर्व और अब जब ये चरम पे है तो कैसा है उसके साथ तब और अब में क्या परिवर्तन हुए है, एक छोटी…
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कोरोना! तूने ये क्या किया
कोरोना! तूने ये क्या किया, पूरी दुनिया को अपनी उंँगलियों पर नचा दिया, अंहकारी व्यक्तियों को धूल चटा दिया, कोरोना तूने ये क्या किया। कोरोना! तूने ये क्या किया, दुनिया की शक्तिशाली देशों को उसकी औकात बता दिया, ज्ञान-विज्ञान की बात करने वालों का मुंँह चुप करा दिया, कोरोना तूने ये क्या किया। कोरोना! तूने…
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कोरोना की मार है ऐसी
सुनी पड़ी गई सड़के सभी, और पड़ गई सुनी गलियां। कोरोना की मार है ऐसी, घर में दुबकी सारी दुनिया। मिलना-जुलना अब होता कम ही, होती ना अपनों की गलबहियाँ। हैंड-शेक से भला नमस्ते लगता अब तो, जब भी मिलते दोस्त और सखियाँ। कोरोना की मार है ऐसी, घर में दुबकी सारी दुनिया। पढ़ाई अभी…
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मजदूरों की रोटियाँ
सोलह मजदूरों को ट्रेन से रौंद दिया जाना और उनका अपने घर ना पहुंच पाना, बहुत दर्दनाक व वीभत्स घटना है। जो भी देखा सुना, जाना, सबके रूह कांप गए। रात भर एक भयावह सपने की तरह सभी को परेशान करता रहा। मजदूर भाइयों की बेबासिया सरकारी अंग से कटकर काल के गाल में चली…
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कितनी बुरी है मधुशाला?
कलमकार भरत कुमार दीक्षित रचित व्यंग्य और हास्य पर आधारित इन रचनाओं का उद्देश्य किसी को आहत करना नही है, महज़ इसे मनोरंजन के लिए पढ़े। १.) खुली हुई है मधुशाला बन्द पड़ी है पाठशालाएँ, खुली हुई है मधुशाला। टूटा सब्र का बाँध कुछ ऐसे, दूरियाँ बहुत नज़दीक हुई जनता का सैलाब उमड़कर, मधुशाला में…
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कोरोना सिखा गया
ये मौसम कोरोना का हमें बहुत सीखा गया। पूरे परिवार को एक साथ बैठना सीखा गया रामायण और महाभारत के संस्कार सीखा गया। स्वच्छ्ता के वो प्राचीन मापदंड याद दिला गया। बर्गर पिज्जा और चाउमीन से दूरी सीखा गया। प्रदुषण से रहित एक दिनचर्या दिला गया। लूडो सांपसीढ़ी ताश कैरम जैसे खेलों का दौर आ…
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चल दिये हैं पैदल
बड़ी खुद्दारी के साथ वो अपनी नन्ही सी बच्ची को कंधे पे बिठाये अपने गॉव के तरफ निकल पडा है। शहर से गॉव कि दूरी लगभग हजारो किलोमिटर होगी फिर भी वह चले जा रहा है । उसके पॉव के छाले अब घाव मे बदल गये है, फिर भी हिम्मत नही हारा चलता चला जा…
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रक्तरंजित रोटियाँ
पटरियों पे रक्तरंजित रोटियाँ, रोटियों संग पड़ी थीं बोटियाँ। थक गये क़दम मुसाफ़िरों के, झपकियाँ पटरियों पे सुला गईं। मुफ़लिसी फिर तितर-बितर हुई, घर पहुँचने की आरज़ू कुचल गई। चीत्कार चौखटें कई करने लगीं। दर्द के दामन में वीरानियां सोने लगीं। वो लौट कर फिर ना आयेंगे कभी, ये जानकर दीवारें दर्द से दरकने लगीं।…
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राष्ट्रधर्म- कोरोना के दौरान
विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र भारत ‘कोरोना’ संकट का सामना कर रहा हैं । जिस धैर्य, संयम, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, दृढ़ इच्छाशक्ति व मजबूती से हम इससे निपट रहें हैं सम्पूर्ण विश्व ‘भारत’ का लोहा मान रहा हैं । आज अमेरिका, इटली जैसे देश ‘कोरोना’ के आगे नतमस्तक हैं इस दरम्यान विश्व के अनेक देशों…
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