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प्रकृति और हम
प्रकृति और प्रेम ~ अनिरुद्ध तिवारी हिलती डोलती हवाओं के साथ बारिश का आनाऔर पेड़ पौधे का मस्त हो जाना,अनुभव करो प्रकृति प्रेम को!ना कोई गिले-शिकवे , ना कोई शिकायत।जैसे झूमती है प्रकृति, अपने तन बदन को भिगोकरबारिश के वक्त, ध्यान से देखना किसी पौधे कोकितना खुश होकर प्रेम को जताने की चेष्टा करती हैठीक…