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प्रीति शर्मा ‘असीम’ जी की दस कविताएं
१. ताज के सामने ताज के सामने,छाते में,दुकान सजाए बैठा है। वह एक आम आदमी है।हर किसी के,सपने को खास बनाए बैठा है। ताज के सामने,छाते में दुकान से सजाए बैठा है। तस्वीरें बनाता है ।ताज के साथ सबकी,वह सब की,एक खूबसूरत,यादगार सजाए बैठा है। वाह री कुदरतजिंदगी की हकीकत मौत कब्र में सोई है।जिंदगी…