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ऋतुराज बसंत का आगमन
ऋतु ये वसंत आई ऋतु ये वसंत आई फूलों की बहार लाईमन में सुमन खिल रहे हैं दिन रात मेंयौवन पे ये निखार करके सौलह श्रृंगारइठलाती जा रही हो बात बिना बात में। जुल्फें ये झूम झूम गालों को रही है चूमत्रबिध समीर बहे रात में प्रभात मेंप्रिये की कसम तोड़ फूलों की ये सेज…