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अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस: मेहनतकशों को सलाम
मैं भी मजदूर ~ चांदनी झा मजदूर, श्रमिक, कुली, दास- जाने क्यों लोग उड़ाते उपहास?गर्मी कड़कती हो, या ठंड बरसात, उसके लिए क्या दिन, क्या रात?मजदूरों की होती इतनी कहानी, प्यास दिल में होती और आंखों में पानी।काले घेरे आंखों के नीचे, अपने सारे सपनों को सीचें,पिचके गाल, बिखरे बाल, मजदूरों का है ऐसा हाल।सब…